आखिरी के दिनों में बिल्कुल अकेले पड़ गए थे पंचम दा, इस लेडी सिंगर के थे फैन..!

फिल्मी दुनिया की जब भी बात होती है, तब राहुल देव बर्मन का नाम अवश्य लिया जाता है। राहुल देव बर्मन के बिना फिल्म जगत अधूरा लगता है। राहुल देव बर्मन को पूरी दुनिया पंचम दा के नाम से जानती है। पंचम दा भले ही अब हमारे बीच नहीं रहे हैं, मगर उनकी लोकप्रियता किसी से कम नहीं हुई है। राहुल देव बर्मन यानि पंचम दा का नाम उन लोगों में शुमार है, जिन्हें पूरी दुनिया कभी नहीं भूल सकती है। भारतीय फिल्म जगत में एक से बढ़कर हिट गाने देने वाले पंचम दा का आज यानि 27 जून को जन्म हुआ था। तो चलिए जानते हैं कि हमारे इस लेख में आपके लिए क्या खास है?

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90 के दशक से लेकर 20वीं सदी तक अपनी आवाज़ से भारतीय फिल्म को एक नये मुकाम पर पहुंचाने वाले राहुल देव बर्मन मतलब पंचम दा को बॉस भी कहा जाता है। फिल्मी दुनिया में राहुल देव बर्मन को पंचम दा के नाम से जाना जाता है, जिन्होंने अपने करियर में 300 फिल्मों में संगीत दिया है। इतना ही नहीं, अपने संगीत से ये हजारों करोड़ों लोगों का दिल चुरा लेते थे। आज भी इनके गाने लोग चांव से सुनते थे। राहुल देव बर्मन को अपना पहला ब्रेक छोटो नवाब से मिला था।

पंचम दा ने कई फिल्मों के लिए संगीत दिया है, मगर महज 9 साल की उम्र में उन्होंने अपना पहला संगीत “ऐ मेरी टोपी पलट के” को दिया, जिसे फिल्म “फ़ंटूश” में इस्तेमाल किया गया। इसके पश्चात पंचम दा ने अपने करियर में मुड़कर नहीं देखा और एक से बढ़कर एक बेहतरीन संगीत दिया। संगीत की दुनिया में पंचम दा को अभी तक कोई टक्कर नहीं दे सका है। बता दें कि पंचम दा लता मंगेशकर की आवाज़ के दीवाने थे, जिसकी वजह से पहली बार उन्होंने जब उन्हें देखा, तब उनसे ऑटोग्राफ लेने पहुंच गए थे।

शम्मी कपूर की फिल्म से हुए थे हिट


राहुल देव बर्मन को पंचम दा बनने का अवसर शम्मी की फिल्म तीसरी मंजिल से मिला। इस फिल्म राहुल देव बर्मन द्वारा दिए गए संगीत को लोगों ने खूब पसंद किया, जिसके बाद वे रातोंरात ही सुपरस्टार बन गए। इस फिल्म के पश्चात राहुल देव बर्मन ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा और संगीत और फिल्म की दुनिया में अपने नाम कई अनोखे रिकॉर्ड दर्ज कराए, जिसको कभी भुलाया नहीं जा सकता है। इसके बाद राहुल देव बर्मन को पंचम दा के नाम से जाना गया और हर कोई इनकी संगीत का कायल हो गया।

आखिरी के दिनों में अकेले पड़ गए थे पंचम दा


अपने करियर में इतनी शौहरत और दौलत कमाने के बाद भी पंचम दा आखिरी समय में बिल्कुल अकेले पड़ गए थे। आखिरी के दिनों में उनके पास कोई नहीं था और उन्होंने अपनी अंतिम सास भी तन्हाई में ली। बता दें कि फिल्मी और संगीत की दुनिया में इन्हें भगवान के रुप में जाना जाता है, क्योंकि इन्होंने संगीत को एक नई दिशा थी, जिसकी बदौलत आज हम संगीत के सातवें आसमान पर हैं।