जम्मू कश्मीर के अनंतनाग में आतंकियों से मुठभेड़ में मेरठ के मेजर केतन शर्मा शहीद, घर में मच गया हंगामा..!

दक्षिण कश्मीर के बडूरा (अनंतनाग) में सोमवार को सुरक्षाबलों और आतंकियों के बीच लगभग 12 घंटे चली मुठभेड़ में मेरठ निवासी मेजर केतन शर्मा (29) पुत्र रविंद्र शर्मा शहीद हो गए। वह कंकरखेड़ा के श्रद्धापुरी सेक्टर चार के रहने वाले थे। उनकी शहादत की खबर मिलते ही परिवारीजन तथा रिश्तेदारों में कोहराम मच गया।

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माता-पिता तो जैसे अपनी सुध ही खो बैठे। मां ऊषा शर्मा की हालत बिगड़ गई तो डॉक्टर को बुलाया गया। हालांकि घंटों तक उनसे केतन के शहीद होने की बात छिपाते हुए सिर्फ घायल होने की बात ही बताई गई। आसपास की महिलाओं ने उन्हें किसी तरह संभाला। लेफ्टिनेंट कर्नल गुरप्रीत सिंह के नेतृत्व में सेना के अफसर भी मेजर के घर पहुंच गए। शोकाकुल परिवारीजन को सांत्वना देने के लिए क्षेत्र के लोगों का तांता लग गया।

कैंट विधायक सत्यप्रकाश अग्रवाल, व्यापारी नेता नीरज मित्तल, ठाकुर ओपी सिंह, पार्षद राजेश खन्ना आदि भी उनके घर पहुंचे तथा परिवारीजन को ढांढस बंधाया। पश्चिमी यूपी सब एरिया मुख्यालय को जम्मू से सेना के द्वारा सूचना भेजी गई है कि मेजर केतन शर्मा आतंकी मुठभेड़ में शहीद हुए हैं। मंगलवार दोपहर तक उनका पार्थिव शरीर दिल्ली पहुंचेगा वहां सेना प्रमुख श्रद्धांजलि देंगे। इसके पश्चात पार्थिव शरीर मेरठ लाया जाएगा।


इकलौते पुत्र थे मेजर केतन


मेजर केतन शर्मा माता-पिता के इकलौते बेटे थे। उनकी एक बहन मेघा हैं जो शादीशुदा हैं। पिता मोदी कांटिनेंटल से रिटायर हैं। वर्ष 2012 में केतन शर्मा आइएमए देहरादून से सेना में लेफ्टिनेंट बने थे। 57 इंजीनियर रेजीमेंट में पहली पोस्टिंग पुणे में हुई थी। दो वर्ष पूर्व अनंतनाग में उनका तबादला हुआ था। मेजर केतन शर्मा की शादी दिल्ली निवासी इरा से लगभग 5 वर्ष पूर्व हुई थी। दोनों की 3 वर्ष की पुत्री काइरा है। केतन शर्मा की शहादत की जब खबर आई तो इरा पुत्री के साथ मायके में थी। देर रात तक वह ससुराल नहीं पहुंची थीं।

शहीद के परिवारीजन को 25 लाख आर्थिक मदद


मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग जिले में आतंकवादियों से मुठभेड़ में शहीद मेरठ निवासी मेजर केतन शर्मा को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की है। योगी ने शहीद के परिजनों के प्रति अपनी गहरी संवेदना प्रकट की तथा 25 लाख रुपये आर्थिक सहायता दिये जाने की घोषणा की। योगी ने कहा कि शहीद के परिवार के एक आश्रित को सरकारी नौकरी दी जाएगी। मेजर केतन शर्मा की स्मृति मेें मेरठ में एक सड़क का नामकरण किया जाएगा। उन्होंने कहा कि प्रदेश के इस वीर सपूत का बलिदान व्यर्थ नहीं जाएगा।

जाने के 22 दिन बाद ही आ गई शहादत की खबर


छुट्टी के पश्चात दोबारा जल्द छुट्टी लेकर लौटने का वादा कर मेजर केतन शर्मा ने खुशी-खुशी परिजनों से विदा लिया था। शायद उन्होंने भी यह नहीं सोचा था कि इस बार की ड्यूटी उन्हें दोबारा छुट्टी लेकर वापस नहीं लौटने देगी। 28 दिनों की छुट्टी के दौरान मेजर केतन शर्मा ने किसी भी परिजन, रिश्तेदार व दोस्तों से मिलने का अवसर नहीं छोड़ा। 26 मई को मेजर शर्मा की छुट्टी समाप्त हुई और वह वापस यूनिट लौट गए। किसने सोचा था कि महज 22 दिनों बाद ही उनकी शहादत की खबर परिवार पर कहर बनकर टूटेगी। पिता की शहादत से अनजान नन्हीं काइरा को पता भी नहीं है कि उसके सिर से पिता का साया उठ चुका है। जिसने भी सुना उसका दिल भर आया। परिजन, पड़ोसी व रिश्तेदारों की आंखें नम हो गई।

तलाशी के दौरान लगी गोली

मेजर केतन शर्मा के ताऊ ने बताया कि दोपहर लगभग दो बजे उनके पास अनंतनाग से सेना के अफसरों का फोन आया। उन्होंने बताया कि आतंकियों के साथ मुठभेड़ में केतन भी शामिल थे। मुठभेड़ में झाड़ियों में छिपे दोनों आतंकियों को गोली लगी। एक की मृत्यु हो गई, जबकि दूसरे की सांस चल रही थी। मेजर केतन की अगुवाई में झाड़ियों में सर्च ऑपरेशन के समय ही आतंकी ने फायरिंग कर दी। एक गोली केतन के सिर में लगी और वह मौके पर ही शहीद हो गए।

देश सेवा के जुनून में सेना में बने अफसर


केतन के परिजनों और दोस्तों के मुताबिक वह बहुत खुशमिजाज थे। सेना में अफसर बनने का उन्हें जुनून था। पढ़ाई में भी वह हमेशा अव्वल रहे। नौवीं कक्षा तक उन्होंने कंकरखेड़ा स्थित अशोका एकेडमी में पढ़ाई की। इसके पश्चात मेरठ पब्लिक स्कूल में 12वीं तक पढ़े। 12वीं के बाद एनडीए की परीक्षा दी। साक्षात्कार में सफल न होने के बाद भी अपने जुनून को शांत नहीं होने दिया। इसके बाद सरूरपुर डिग्री कालेज से बीएससी की। कुछ दिन प्राइवेट नौकरी भी की। साथ ही सीडीएस की परीक्षा भी देते रहे। उन्होंने यह परीक्षा और इंटरव्यू पास कर लिया और आइएमए देहरादून ट्रेनिंग पूरी की।

मेरे रानू को कुछ हो गया तो मैं भी उसके साथ जाऊंगी

मां ऊषा देवी से परिजनों ने मेजर केतन ऊर्फ रानू की शहादत की बात घंटों तक छिपाए रखी। उन्हें बताया गया कि वह गोली लगने से घायल हुए हैं और ठीक हो जाएंगे। रिश्तेदारों और आसपास के लोगों की भीड़ इकट्ठा होती देख उन्हें अनहोनी की आशंका हुई। वह बार-बार पुत्र के बारे में पूछतीं। कभी उनसे फोन पर बात कराने तो कभी उनके पास चलने के लिए कहतीं। उन्होंने कहा कि मेरे रानू को यदि कुछ हो गया तो मैं भी उसके साथ ही चली जाऊंगी। परिजनों और आसपास की महिलाओं ने उन्हें किसी तरह संभाला। पुत्र के लिए मां को तड़पते देख मौके पर मौजूद लोगों और सेना के अफसरों की आंख भी नम हो गई।