बेटे के लिए पिता बेच रहा था किडनी, खबर देखकर बीजेपी सांसद ने कहा- मैं उठाऊंगा पूरा खर्च, प्रशन्न हुआ बच्चा..!

गुजरात में नवसारी जिले के वांसदा तालुका में एक अंधा बाप अपने बेटे की पढ़ाई के लिए खुद की किडनी बेचने वाला था, मीडिया में यह खबर देखने के पश्चात एक भाजपा सांसद ने पूरे खर्चे का जिम्मा उठाने की घोषणा कर दी। एक दिन पहले ही वनइंडिया ने भी यह खबर दी थी कि आदिवासी इलाके में एक दिव्यांग पिता अपने बेटे के डॉक्टर बनने के सपनों को पूरा कराना चाहता है। किंतु, आर्थिक और शारीरिक रूप से अक्षम हैं। उन्हें एकमात्र यह रास्ता दिख रहा था​ कि किडनी बेचकर बेटे की पढ़ाई कराएंगे। उनकी यह परेशानी मीडिया में आई, जिसके दूसरे दिन ही भाजपा सांसद सीआर. पाटिल ने कहा कि वे उन्हें किडनी नहीं बेचने देंगे। उन्होंने कहा कि दिव्यांग के होनहार बेटे को डॉक्टर बनाने के लिए आर्थिक सहायता अवश्य दी जाएगी।'

किडनी बेच रहे थे पिता, सांसद ने सुन ली
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बता दें कि, सीआर पाटिल वही सांसद हैं, जिनके नाम 2019 के लोकसभा चुनाव में सर्वाधिक वोटों से जीतने का रिकॉर्ड है। उन्हें जब ये पता चला कि उनके राज्य में एक पिता अपने बेटे के लिए किडनी बेचने वाला है तो सीआर पाटिल ने उन्हें ऐसा करने से रोक दिया। जिसके बाद आज देखा गया कि दिव्यांग का वह बेटा साहिल मुस्कुराते हुए नई साइकिल पर बैठा था। वह खुश भी नजर आ रहा था, क्योंकि उसे स्कूल में दाखिला मिल गया था।


मां-पिता गरीब हैं ​और मां ही मजदूरी कर घर चला रहीं


उप्सल गांव में रहने वाले साहिल ने 10वीं कक्षा में 90.59 प्रतिशत मार्क्स हासिल किए थे। उसकी इच्छा है कि वह बड़ा होकर डॉक्टर बने और लोगों की सेवा करे। इसलिए वह डॉक्टर की पढ़ाई करना चाहता है। उसके माता-पिता गरीब हैं ​और पिता के अंधा हो जाने की वजह से घर को उसकी मां ही संभालती हैं। वह मजदूरी का काम करती हैं।

सीआर पाटिल का ऐलान होते ही कर दी गईं ये व्यवस्थाए


उधर, सीआर पाटिल द्वारा साहिल की सहायता किए जाने का ऐलान किए जाने के बाद भाजपा कार्यकर्ता साहिल की मदद करने के लिए आ पहुंचे। उन्होंने इस लड़के को वित्तीय सहायता की पेशकश की है। पाटिल तथा नवसारी जिला पंचायत के अन्य सदस्यों ने साहिल का दाखिला एक उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में करवाया और उनके लिए आवश्यक सामग्री सहायता भी प्रदान की।

यह बोले सांसद सीआर पाटिल


सांसद पाटिल ने कहा कि, हमने साहिल को चिकली में एबी स्कूल में दाखिला दिलवाया है। उसे अपने गाँव से बस में सवार होना है, मगर निकटतम बस स्टॉप लगभग 5 किलोमीटर दूर है। इसलिए हमने उसके लिए बस पकड़ने के लिए साइकिल की भी व्यवस्था की है। हमने जब यह देखा कि उसका परिवार कठिनाइयों से गुजर रहा है तो हमने उन्हें राशन भी प्रदान किया है। जो उन्हें एक साल के लिए पर्याप्त होगा।''