इस नदी में मिला राम नाम का युगों पुराना पत्थर, चमत्कार देखकर हैरान रह गए लोग...!

हिन्दुस्तान में भगवान श्रीराम के प्रति लोगों की कितनी आस्था है ये किसी से छिपा नहीं है। श्रीराम का जन्म हजारों साल पहले सतयुग में हुआ था। किन्तु आज भी मर्यादा पुरुषोत्म श्रीराम की निशानियां इस धरती में बाकि हैं। ऐसा ही चमत्कार हुआ है, क्योंकि एक जीता जागता प्रमाण या यूं कहें वो पत्थर मिल गया है, जो पानी में डालने से तैरता है। जी हैं यूपी के हमीरपुर जिले में यमुना नदी में राम नाम लिखा हजारों वर्ष पुराना पत्थर मिला है। जो तैरता है, जिसका वीडियो भी अब सामने आ गया है। कथा तब की है जब असुर सम्राट रावण माता सीता का हरण कर उन्हें अपने साथ लंका ले गया था, तब श्रीराम ने वानरों की सहायता से समुद्र के बीचो-बीच एक पुल का निर्माण किया था। यही आगे चलकर रामसेतु कहलाया था। कहते हैं कि यह विशाल पुल वानर सेना द्वारा केवल 5 दिनों में ही तैयार कर लिया गया था। कहते हैं कि निर्माण पूर्ण होने के बाद इस पुल की लम्बाई 30 किलोमीटर और चौड़ाई 3 किलोमीटर थी। आज ये पुल डूब चुका है, किन्तु इसके अंश आज भी उपस्थित हैं।

जब नदी में तैरता मिला राम नाम का पत्थर


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ऐसा ही एक अंश या कहें वो पत्थर जो सतयुग में सिर्फ राम लिख देने से पानी में तैरने लगता था। जिसकी बदौलत रामसेतु का निर्माण हुआ था। वो पत्थर यूपी के हमीरपुर-कानपुर बॉर्डर के सजेती थाना क्षेत्र में मिला है। यहां से होकर बहने वाली यमुना नदी में मछुआरों को एक पत्थर मिला। जो तैर रहा था। जिसका वजन करीब 11 किलो है। खास बात ये हैं कि उस पत्थर में भी राम लिखा हुआ है। इस इलाके में पहले भी ऐसी चीजें मिल चुकी है। कुछ वर्ष पहले यहां हनुमान जी की मूर्तिे भी इसी तरह यमुना में तैरती मिली थी। जिसकी आज पूजा होती है। उसे गांव में स्थापित कर मंदिर बनवाया गया था।

सतयुग का हो सकता है पत्थर


अब पानी में न डूबने वाले पत्थर की ख़बर मिलने के बाद पत्थर को देखने के लिए लोगों की भीड़ एकत्रित हो गई। लोगों ने इसे बाहर निकलवाकर मऊनखत गांव में हनुमान मंदिर में स्थापित करवाया और पूजा-पाठ शुरू कर दी। लोगों का कहना है, कि सैकड़ों वर्ष पहले त्रेतायुग में भगवान राम ने लंका विजय करने के लिए जो पत्थरों से राम सेतु बनाया था।

ये पत्थर उसी सेतु का एक भाग हो सकता है। कोई इसे चमत्कार बता रहा है तो कोई भगवान का रूप। ऐसी मान्यता है कि इस पुल को बनाने के लिए जिन पत्थरों का प्रयोग किया गया था वह पत्थर पानी में फेंकने के बाद समुद्र में नहीं डूबे। बल्कि पानी की सतह पर ही तैरते रहे। ऐसा क्या कारण था कि यह पत्थर पानी में नहीं डूबे ? कुछ लोग इसे धार्मिक महत्व देते हुए ईश्वर का चमत्कार मानते हैं

श्रीराम ने बनाया था पुल


हिन्दू धार्मिक ग्रंथ रामायण के मुताबिक़ यह एक ऐसा पुल है, जिसे भगवान विष्णु के सातवें एवं हिन्दू धर्म में विष्णु के सबसे अधिक प्रसिद्ध रहे अवतार श्रीराम की वानर सेना द्वारा भारत के दक्षिणी भाग रामेश्वरम पर बनाया गया था, जिसका दूसरा किनारा वास्तव में श्रीलंका के मन्नार तक जाकर जुड़ता है। परन्तु आज किन्हीं कारणों से अपने आरंभ होने से कुछ ही दूरी पर यह समुद्र में समा गया है। रामेश्वरम में कुछ समय पहले लोगों को समुद्र तट पर कुछ वैसे ही पत्थर मिले जिन्हंब प्यूमाइस स्टोन कहा जाता है। लोगों का मानना है कि यह पत्थर समुद्र की लहरों के साथ बहकर किनारे पर आए हैं। बाद में लोगों के बीच यह मान्यता फैल गई कि हो ना हो यह वही पत्थर हैं, जिन्हें श्रीराम की वानर सेना द्वारा रामसेतु पुल बनाने के लिए प्रयोग किया गया होगा।