2012 में ही पद छोड़ना चाहती थी शीला दीक्षित, निर्भया के कारण बदला था निर्णय..!

दिल्ली की चहेती मुख्यमंत्री शीला दीक्षित अब हमारे बीच नहीं रही। शीला दीक्षित ने शनिवार यानि 20 जुलाई को आखिरी सांस ली, जिसके पश्चात पूरा देश शोक में डूब गया। जी हां, शीला दीक्षित न केवल दिल्ली की मुख्यमंत्री थी, बल्कि ग्रैंड मदर थी। शीला दीक्षित ने दिल्ली को आधुनिक दिल्ली में तब्दील किया। आज दिल्ली जितनी प्यारी औ सुंदर दिखती है, वह सिर्फ शीला दीक्षित की ही देन है। मुख्यमंत्री रहते हुए शीला दीक्षित ने दिल्ली को अपने पसीने से सींचा, मगर वे 2012 में ही अपना पद छोड़ने का मन बना चुकी थी। तो चलिए जानते हैं कि हमारे इस लेख में आपके लिए क्या खास है?
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दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित ने पद पर रहते हुए जनहित में बहुत सारे कदम उठाए, जिसकी मदद से ही आज राजधानी का विकास हो सका है। साल 1998 से 2013 तक मुख्यमंत्री रहने वाली शीला दीक्षित ने 2012 में ही पद को छोड़ने का मन बना चुकी थी, मगर उस दौरान निर्भया कांड की वजह से उन्होंने अपना मन बदल लिया। इतना ही नहीं, उस वक्त शीला दीक्षित काफी ज्यादा बीमार थी, लेकिन फिर भी अपने फर्ज़ से उन्होंने मुंह नहीं मोड़ा।

2012 में इस्तीफा देने वाली थीं शीला दीक्षित
दिल्ली की चहेती मुख्यमंत्री शीला दीक्षित ने वर्ष 2012 में बीमारी की वजह से इस्तीफा देने का मूड बना लिया था, मगर निर्भया कांड की वजह से उन्हें अपना फैसला बदलना पड़ा था। दरअसल, साल 2012 के दिसंबर में दिल्ली में निर्भया जैसे जघन्य अपराध हुआ, जिसने पूरे देश को झकझोंर के रख दिया। इस घटना ने शीला दीक्षित को पूरी तरह से झकझोंर के रख दिया था, जिसकी वजह से उन्होंने उस वक्त इस्तीफा नहीं दिया और अपना फर्ज निभाया, लेकिन उस समय उनकी हालत बहुत अधिक खराब थी।

निर्भया घटना के बाद शीला दीक्षित ने लिखा था ये पत्र
शीला दीक्षित ने लिखा था कि निर्भया घटना के पश्चात मैं पसोपेश में थी, जिसे मेरे परिवार ने महसूस करने के साथ ही,मुझसे पद छोड़ने का आग्रह भी किया था, जोकि पहले से ही तय था। शीला दीक्षित ने कहा कि मैं इस्तीफा देने वाली थी, मगर फिर मुझे लगा कि ऐसा करना मैदान छोड़कर भागने जैसा हो जाएगा और फिर मैंने मैदान में रहते हुए फर्ज निभाने का फैसला किया। साथ ही उन्होंने लिखा कि मैंने निर्भया घटना को मैंने बहुत ही शालीनता से देखरेख किया और उस दौरान मुझे बहुत विरोध का भी सामना करना पड़ा था।

शीला दीक्षित का जाना कांग्रेस के लिए बड़ी क्षति
दिल्ली में भले ही पिछले कई चुनावों में शीला दीक्षित को हार का सामना करना पड़ा हो, परन्तु उनका जनादेश काफी कमाल का था। शीला दीक्षित को दिल्ली वाले ग्रैंड मदर की तरह मानते थे, जिसकी वजह से यह एक बड़ी क्षति है। इतना ही नहीं, दिल्ली कांग्रेस के नेतृत्व पर भी संकट छा गया, क्योंकि शीला दीक्षित जैसी छवि रखने वाला दूसरा कोई लीडर कांग्रेस के पास नहीं है, ऐसे में देखने वाली बात यह है कि अब दिल्ली में कांग्रेस की कमान किसको मिलती है।