25 साल सेना में नौकरी की, अब सिद्ध करनी पड़ रही है नागरिकता..!

असम में केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) में 25 वर्ष से नौकरी कर रहे एक जवान को विदेशी ट्रिब्यूनल D-वोटर ने नोटिस देकर नागरिकता साबित करने को कहा गया है। जवान को समझ में नहीं आ रहा है कि नागरिकता साबित करने के लिए क्या करना होगा। उसके पास जन्म से लेकर सर्विस तक का हर प्रमाण है फिर भी उसे प्रमाणित करना पड़ रहा है। महमूद अली नामक जवान ने मीडिया को बताया कि उसे कामरूप जिले में स्थित एक विदेशी ट्रिब्यूनल द्वारा संदिग्ध मतदाता नोटिस जारी किया गया है। नोटिस के कारण उन्हें मजबूरन बांकुरा से घर वापस आना पड़ा।
दालगांव में नागारबेरा के निवासी अली ने बताया कि 25 साल तक वह सीआईएसएफ जवान के रूप में देश की सेवा की है। फिर भी उनको अपनी भारतीय नागरिकता सिद्ध करनी पड़ रही है। क्या सरकार ने उनको यही इनाम दिया है। उनके पास 1947 से सभी आवश्यक दस्तावेज हैं। उनके पास उनके पिताजी के स्कूल प्रमाण भी हैं। कामरूप के डिप्टी कमिश्नर कमल कुमार बैश्य ने बताया कि उन्हें नोटिस के बारे में जानकारी मिल चुकी है और इस मामले को देखेंगे।

विरोध में प्रदर्शन
स्थानीय लोगों ने अली को मिले नोटिस को लेकर प्रदर्शन किया तथा सरकार से लोगों को परेशान न करने की मांग की। एक प्रदर्शनकर्ता ने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि सरकार द्वारा बार-बार सीआईएसएफ और सेना के जवानों को विदेशी घोषित किया जा रहा है। हमें न्याय चाहिए और ये जवाब भी कि वास्तव में वह क्या कर रही है। मई में असम बॉर्डर पुलिस के सब-इंस्पेक्टर एमडी सनाउल्लाह को विदेशी ट्रिब्यूनल द्वारा विदेशी घोषित कर दिया गया तथा गोलपारा जिले के हिरासत केंद्र में भेज दिया था। जून में गुवाहाटी हाईकोर्ट द्वारा जमानत मिलने के बाद उन्हें रिहा किया गया।

तीन साल हिरासत में रहीं मधुबाला मंडल

गलत पहचान के एक अन्य मामले में 59 वर्ष की मधुबाला मंडल को तीन साल पहले गिरफ्तार किया गया था। बाद में असम पुलिस ने विदेशीय ट्रिब्यूनल के सामने स्वीकार किया कि यह गलत पहचान का मामला था। बता दें कि असम में करीब 100 विदेशी ट्रिब्यूनल हैं जो नागरिकता निर्धारित करने के लिए अर्ध-न्यायिक निकाय हैं। वे जिन लोगों को विदेशी घोषित करते हैं उन्हें हिरासत केंद्रों में भेजा जाता है। असम में नागरिकता का मामला तूल पकड़ रहा है और इसकी विसंगतियों के कारण कई लोग अनावश्यक रूप से दंडित किया जा रहा है। विभिन्न राजनीतिक दलों ने इसका विरोध भी शुरू कर दिया।