कभी टैक्सी वाले ने बचाई थी जान, फिर लड़की ने 3 वर्ष पश्चात ऐसे चुकाया एहसान...!

आज यदि देखा जाये तो लाखों लोगो में से 2-4 लोग ही ऐसे मिलते है जो इंसानियत की खातिर अपना सबकुछ कुर्बान कर देते हैं। आज मैं आपको ऐसी ही एक घटना बताने जा रहा हूँ जो आपको इंसानियत का पाठ अवश्य पढ़ा देगी। सहारनपुर जिले के रहने वाले राजवीर ने एक नई टैक्सी खरीदी थी। एक दिन काम पर लेट हो जाने के वजह से वह सुबह सुबह समय बचाने के लिए टैक्सी को तेज चला रहे थे। तभी उन्होंने देखा कि सड़क किनारे कुछ लोगों की भीड़ जमी हुई है तो राजवीर ने टैक्सी रोककर जब पास जाकर देखा तो उसके होश उड़ गए। उसने देखा कि एक खूबसूरत लड़की सड़क पर खून से लतपथ हैं और कोई उसकी सहायता नहीं कर रहा है। आनन फानन में राजवीर ने लड़की को टैक्सी में बिठाया और अस्पताल लेकर चला गया।
loading...
हॉस्पिटल पहुंचते ही राजीव को डॉक्टर ने ऑपरेशन के लिए दो लाख लाने को कहा। बिना सोचे-समझे उसने 2.5 लाख में टैक्सी बेचकर उसका ऑपरेशन करवाया। ठीक होने के पश्चात वह लड़की अपने घर चली गयी। अपनी खरीदी हुई टैक्सी बेचने के बाद राजवीर काफी समय तक दिल्ली में भाड़े पर टैक्सी लेकर चलाता रहा। इस घटना के तीन साल बाद एक लड़की उसके घर पर आयी। उसने राजवीर की माँ के पाँव छुए राजीव ने उसे देखते ही पहचान लिया कि यह तो मेरी बहना आसीमा है।
जिसकी उन्होंने अपनी टैक्सी बेच कर जान बचायी थी आसिमा ने उसे अपनी डिग्री के कन्वोकेशन में आने को कहा। राजवीर की आर्थिक स्थिति काफी खराब थी। फिर भी उसने सोचा कि बहन ने बुलाया है तो जाना तो पड़ेगा। यूनिवर्सिटी के उस हॉल में राजवीर भी अपनी बूढ़ी मां के साथ आया और सबसे पीछे बैठ गया।
यूनिवर्सिटी के हॉल में कन्वोकेशन प्रोग्राम शुरू होने के पश्चात मुख्यअतिथि द्वारा पहला नाम ही आसिमा का बुलाया गया। मुख्यअतिथि ने कहा इस बेटी ने गोल्ड मेडल जीता है आसिमा ने कहा कि सर मुझे 1 मिनट का समय चाहिए और दौड़ कर राजवीर के पास गई और बोली मेडल का असली हकदार मेरा भाई है और भरी सभा में तीन साल पहले की पूरी घटना बताई। इसको सुनने के पश्चात वहां बैठे सभी लोगों की आंखों से आंसू आ गए। इसके बाद उसने भाई को एक टैक्सी दी और उन्ही के साथ रहने लगी।