भारत सरकार ने बढ़ाई 65 पैसे किलो धान की कीमत, कैसे दोगुनी होगी किसानों की आय?

पहली मोदी सरकार के वित्त मंत्री अरुण जेटली ने जब 20018-19 का बजट पेश किया था, तो उसमें सबसे अधिक फोकस किसानों पर रखा गया था। कहा गया था कि 2022 तक किसानों की आमदनी दोगुनी कर देंगे। इसके लिए सरकार ने एमएसपी यानी कि न्यूनतम समर्थन मूल्य बढ़ाने की बात कही थी और फिर तय हुआ था कि 20017-18 में जिस धान का समर्थन मूल्य 1550 रुपये प्रति क्विंटल था, उसे अब 1750 रुपये प्रति क्विंटल किया जाएगा। सीधे-सीधे 200 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी की गई थी। पहली मोदी सरकार का कार्यकाल समाप्त हुआ और दूसरा कार्यकाल शुरू हो गया। इसके बाद एक बार फिर से समर्थन मूल्य बढ़ाने का फैसला हुआ।
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3 जुलाई, 2019 को फैसला हुआ कि धान के समर्थन मूल्य में 65 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी की जाएगी। यानी कि 65 पैसे प्रति किलो। इस लिहाज से 2019 में धान पैदा करने वाले किसानों को अब 1815 रुपये प्रति क्विंटल मिलेगा। बाकी एमएसपी क्या होती है और ये कैसे तय होती है, यहां क्लिक करके पढ़ सकते हैं। यदि सिर्फ धान, उसकी एमएसपी और उसका इतिहास जानना हो तो यहां क्लिक कर लीजिए। बाकी इस एमएसपी की वजह से किसानों की आमदनी पर कितना फर्क पड़ रहा है, उसे जानने के लिए यहां क्लिक करके पढ़ सकते हैं। लागत है 1208 रुपये, कैसे दोगुनी होगी आमदनी
सरकार ने खुद बताया है कि एक क्विंटल धान पैदा करने में 1208 रुपये की लागत आती है।


केंद्र सरकार ने स्वयं माना है कि एक क्विंटल धान पैदा करने में 1208 रुपये का खर्च आता है। इस खर्च में आदमी की मेहनत, मशीनों पर हुआ खर्च, ज़मीन की कीमत, कच्चा माल जैसे बीज खाद और दवा के अलावा सिंचाई और अन्य चीजें शामिल हैं। अब सरकार कह रही है कि 2022 तक किसानों की आमदनी दोगुनी कर देंगे। 2019 के लिहाज से देखें और सरकार का ही कहना माने तो अभी तो किसानों को सिर्फ और सिर्फ डेढ़गुना ही मिल रहा है। यदि सरकार को किसानों की आमदनी दोगुनी करनी ही है तो या तो इस समर्थन मूल्य को 2416 रुपये करना होगा, जो अभी के समर्थन मूल्य 1815 रुपये से 601 रुपये कम है।
इस साल धान के न्यूनतम समर्थन मूल्य में 65 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी हुई है।

यदि ये भी मान लें कि सरकार हर साल इसी तरह से न्यूनतम समर्थन मूल्य 65 रुपये बढ़ाती रहेगी तो इसे दोगुना करने में कम से कम 10 साल का समय लगेगा। और ये भी तब संभव होगा, जब धान की उपज लागत 2416 रुपये पर स्थिर रहे, जो नामुमकिन है। ऐसा इसलिए है, क्योंकि हर साल तेल की कीमत, खाद-बीज की कीमत, दवाओं की कीमत, ज़मीन का किराया और किसान का खर्च लगातार बढ़ता ही जाता है। ऐसे में सरकार का ये दावा है कि 2022 तक किसानों की आमदनी दोगुनी हो जाएगी, फिलहाल तो हवाहवाई ही दिख रहा है।

देखिए पिछले 11 साल में कितना बढ़ा है न्यूनतम समर्थन मूल्य?

ये तो रही धान की बात। धान की बात इसलिए क्योंकि पूरे देश में इसकी खेती होती है और हर दूसरा किसान धान की खेती करता ही करता है। मगर सरकार ने और भी फसलों का समर्थन मूल्य बढ़ाया है। अगर इस लिस्ट को गौर से देखें तो पता चलता है कि सरकार ये मानती है कि बाजरे की खेती किसानों के लिए सबसे मुनाफे का सौदा है। सरकार का मानना है कि एक क्विंटल बाजरा उगाने में किसानों का 1083 रुपये खर्च होता है, जबकि बाजरे का नया समर्थन मूल्य 2000 रुपये है। वहीं यदि पैसे में बढ़ोतरी देखें तो समर्थन मूल्य में सबसे कम बढ़ोतरी बाजरे की ही हुई है, जबकि सबसे ज्यादा बढ़ोतरी पीले वाले सोयाबीन में की गई है।