व्हीलचेयर पर बैठकर आया दूल्हा, 7 फेरे भी इसी पर बैठे-बैठे लिए, दुल्हन ने लिया था यह निर्णय..!

मध्यप्रदेश के राजगढ़ जिले में एक शादी चर्चा का विषय बनी हुई है। इसमें दूल्हे ने अपनी शादी की सारी रस्में व्हीलचेयर पर बैठे-बैठे ही पूरी की। यहां तक की वरमाला और फेरे भी व्हीलचेयर पर बैठकर ही लिए गए। दरअसल, राजगढ़ जिले के जूना ब्यावरा में रहने वाले दिलीप सक्सेना (38) शादी से 7 दिन पहले हादसे का शिकार हो गया। 5 जून को खिलचीपुर से शादी के कार्ड बाटंकर लौट रहा दिलीप बाइक का टॉयर फटने से घायल हो गया था। इसके हाथ-पांव फ्रैक्चर हो गए।

दूल्हे का निजी हॉस्पिटल में ऑपरेशन
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12 जून को शादी से पहले दिलीप का भोपाल के एक निजी हॉस्पिटल में ऑपरेशन हुआ। उसकी हालत को देखते हुए परिजनों ने शादी की तारीख आगे बढ़ाने का फैसला लिया। इस पर विदिशा की दुल्हन दीप्ति दिलीप से मिलने अस्पताल पहुंची। उन्होंने आपस में कुछ समय चर्चा की और खुद ने शादी 12 जून को ही करने का निर्णय किया। दीप्ति के इस हौसले की पूरे समाज और परिवार, रिश्तेदारों में तारीफ हो रही है।

दुल्हन के फैसले की सब कर रहे है तारीफ
दूल्हे के माता-पिता इस बात से हैरान थे कि कहीं रिश्ता न बिगड़ जाए और कहीं कोई समस्या न हो। डरे और दुखी माता-पिता अस्पताल में ही थे, जहां दीप्ति ने बिना किसी चिंता के पूर्व निर्धारित तिथि को ही शादी करने की बात रख दी। मंगलवार को हिंदू रीति-रिवाज से दोनों फेरे लिए। भोपाल में ही भर्ती दिलीप से मिलने सोमवार को प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान भी पहुंचे और दीप्ति के साहस की तारीफ की।

रिश्ते दिल से निभाए जाते हैं-दुल्हन
दुल्हन दीप्ति ने कहा कि रिश्ते दिल से निभाए जाते हैं। ये सीधे आत्मा का मिलन होता है। किसी के चेहरे या शरीर से कोई फर्क नहीं पड़ता। मैंने स्वेच्छा से यह निर्णय लिया है। किसी के साथ शादी के बाद किस प्रकार का हादसा होता है तो क्या उस से रिश्ता तोड़ दिया जाता है ऐसा नहीं है। मैं सभी से यही कहना चाहूंगी कि अपने रिश्ते को अहमियत दें, जीवन में उतार-चढ़ाव तो आते रहते हैं।

खुशनसीब हूं जो ऐसी पत्नी मिल रही है-दूल्हा
वहीं हादसे में घायल दुल्हे दिलीप का कहना है कि भगवान, परिजन और ईष्ट मित्रों के आशीर्वाद से मैं स्वस्थ हूं। मेरी होने वाली पत्नी ने वाकई बड़ा फैसला लिया है और मेरे दिल को जीत लिया। इससे यह साबित भी हुआ है कि समाज में अभी भी भारतीय संस्कृति, हमारे संस्कार जीवित है।