मदद की गुहार के लिए बनारस की 80 वर्ष की मां ने तख्ती पर जो लिखा है, वह आंखें भिगो देने वाला है..!

‘हमारी मदद करो, मैं काफी गरीब औरत हूं। हमारा एक लड़का था महेंद्र वर्मा, वही हमारा पेट पालन करता था। 18 महीने से नेपाल जेल में बंद है। मैं भीख मांग के खा रही हूं। मैं मोदीजी सुषमा स्वराज के पास जाना चाहती हूं। मैं जा नहीं पाती। कचहरी, डाक घर से भी कोई सुनवाई नहीं हुई। 10-20 रुपए देकर हमारी मदद करो। भीख मांग के पैसा जुटा रही हूं। अपने लड़के को छुड़ाना चाहती हूं।‘
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हमारे कुछ पाठकों ने ये फोटो मेल की। कहा कि यदि ये फोटो सच है तो उनकी मदद करिए। हमने इस बारे में जानकारी जुटाई। पता चला कि अम्मा बनारस की रहने वाली हैं। पांडेपुर इलाके की। जैसा कि कुछ पोस्ट में बताया भी गया है। उनका बेटा नेपाल जेल में करीब तीन साल से बंद है। वह उसे छुड़ाने के लिए लंबे समय से नेताओ और अधिकारियों से गुहार लगा रही हैं, लेकिन सुनवाई नहीं हो रही है। सोशल मीडिया पर लोग योगी आदित्यानाथ, यह माता जी वाराणसी के पांडेयपुर मुहल्ला बैरीबन में रहती है इनका एक बेटा है जो 18 माह से नेपाल जेल में बंद है जिसका कुछ पता नही चल रहा है कि क्यो बंद है इस मां का दुखड़ा कोई नही सुनेगा? कृपया इनकी मदद करें।
उनका बेटा फल-फूल लाद कर नेपाल के काठमांडू जा रहा था। एक होटल पर रुके, चाय पीने के लिए। आगे बुलेट वाला था और पीछे जीप वाला था। एक्सीडेंट हो गया। मेरा बेटा उतर कर देखने लगा कि क्या हुआ। नेपाल पुलिस मेरे लड़के को पकड़कर ले गई। जब रात में हम खाना खाने बैठे तो फोन आया। उन्होंने बताया कि मैं जेल जा रहा हूं। पूछा गया कि क्यों, तो उन्होंने पूरी घटना बताई। बेटे को जेल से रिहा कराने के लिए मैंने कई लोगों से मदद की गुहार लगाई। लेकिन किसी ने मेरी मदद नहीं की। आज यदि मेरे पति होते तो वह खुद उसे छुड़ा कर ले आते।

उन्होंने आगे बताया कि
अगर मैं किसी से 10 रुपए भी मांगने जाती हूं तो कोई नहीं देता है। लोग पूछते हैं कि पैसे देने पर कैसे लौटाएंगी। मैं अपने बेटे के लिए इधर-उधर भटक रही हूं। लोग जहां-जहां बताते हैं मैं जाती हूं। मगर मेरा काम नहीं हो रहा है। जहां जाती हूं लोग मुझे भगा देते हैं। कहते हैं हम लोगों से नहीं होगा। मैं क्या करूं। यदि विदेश मंत्री पाकिस्तान से लोगों को छुड़ा कर ला सकती हैं तो नेपाल तो अपना देश है। मैं अपने बेटे को कैसे छुड़ाऊं? अम्मा ने ये भी बताया था कि वह बीजेपी कार्यालय भी जाती हैं, जब-जब कागज पत्र लेकर जाती हैं, वे लोग उन्हें भगा देते हैं। हमने इस बारे में जानने के लिए बनारस के डीएम ऑफिस में फोन किया। फोन जीतेंद्र कुमार चौबे ने उठाया। हमने उन्हें इस मामले से अवगत कराया। उन्होंने कहा,
लगभग 10 रोज पहले डीएम साहब अम्मा से मिले थे। उन्होंने कहा था कि ऑफिस में आकर मिल लें, लेकिन अम्मा नहीं आईं। यदि वह आती तो उनके मामले को देखते। अगर आप उन्हें ऑफिस भेज दें तो मैं तुरंत ही उनके मामले को देखूंगा। 80 साल की बुजुर्ग अम्मा अगर डीएम ऑफिस नहीं पहुंच पा रही हैं तो डीएम को खुद उनसे संपर्क करना चाहिए। वह किसी को भेज कर उन्हें कार्यालय बुला सकते हैं। प्रशासन यदि उनकी मदद करना चाहे तो कर सकता है। लोग सोशल मीडिया पर अम्मा की आवाज उठा रहे हैं। डिजिटल इंडिया के युग में उम्मीद की जानी चाहिए कि उनकी बात पीएम मोदी और विदेश मंत्रालय तक पहुंचेगी और अम्मा अपने बेटे से मिल पाएंगी।