आईआईटी के स्टूडेंट के 8 पन्नों के सुसाइड नोट में लिखी बातें विचलित करती हैं..!

आज की तारीख में शायद ही कोई ऐसा हो, जो अपने जीवन से खुश हो। दुख सबकी ज़िन्दगी में आता है बस अंतर ये है कि कोई उस दुख की वजह से स्ट्रेस और डिप्रेशन में चला जाता है, तो कोई उससे लड़कर जीत जाता है या जीतने की कोशिश में लग जाता है। आज स्ट्रेस और डिप्रेशन, डायबिटीज़ से भी तेज़ फैल रहा है। और इसका सबसे अधिक शिकार होते हैं युवा। खास तौर पर स्टूडेंट्स।

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दरअसल हुआ क्या कि M Tech फाइनल इयर के स्टूडेंट मार्क एंड्रयू चार्ल्स ने मंगलवार को होस्टल के कमरे में पंखे से लटक कर जान दे दी। मार्क सोमवार रात 11 बजे अपने कमरे में गए थे जिसके पश्चात उन्हें किसी ने नहीं देखा था। काफी समय तक जब उनका कुछ भी पता नहीं लगा तो उनके दोस्तों ने कमरे का दरवाज़ा खोला और उन्हें पंखे से लटका पाया।

मार्क के दोस्त ने बताया कि वो डिजाइनिंग में मास्टर डिग्री की पढ़ाई कर रहे थे। कुछ ही दिन पहले उनके फाइनल इयर के एग्जाम खत्म हुए थे। इसके पश्चात वो अपनी फाइनल प्रज़ेन्टेशन की तैयारी कर रहे थे। मार्क वाराणसी के रहने वाले थे। मार्क की डायरी में एक सुसाइड नोट भी मिला जिसमें लिखा हुआ था कि शायद उनके मार्क्स अच्छे न आएं और इस दुनिया में फेलियर का कोई फ्यूचर नहीं है।

मैंने कभी नहीं सोचा था कि मैं आप सब को निराश करुंगा। मुझे कभी याद न करना क्योंकि मैं इसके लायक नहीं हूं। बस ये याद रखना कि मैं भी तुम लोगों को उतना ही प्यार करता हूं जितना तुम लोग मुझे करते हो। मार्क ने नोट में अपने मां-बाप को अच्छे माता-पिता होने के लिए थैंक्स बोला साथ ही लिखा कि मैं अपनी नाकामयाबी के लिए माफी मांगता हूं। मार्क ने ये भी बोला कि उनके पास कोई नौकरी नहीं है और शायद मिलेगी भी नहीं। साथ ही उन्होंने अपने कुछ दोस्तों के नाम लेके बोला कि-

अंकित, रज्जो आईटी इंडस्ट्री में काम करते-करते अपनी जिंदगी मत भूल जाना। एक-एक पल को जीना, क्योंकि एक ही लाइफ मिलती है। डीएसपी का कहना है कि चिंता और डिप्रेशन के वजह से ही शायद मार्क ने ये कदम उठाया है।

आईआईटी ने भी अपने स्टूडेंट सुसाइड पर दुख व्यक्त किया है। आईआईटी हैदराबाद में ये साल की दूसरी घटना है, जब किसी स्टूडेंट ने सुसाइड किया हो। इसी साल फरवरी में एक थर्ड ईयर के स्टूडेंट ने हॉस्टल की सांतवीं मंज़िल से कूद कर जान दे दी थी। WHO के 2018 के डेटा के मुताबिक हर वर्ष पूरे विश्व में 8 लाख लोग सुसाइड करते हैं। इसका सबसे बड़ा कारण है स्ट्रेस और डिप्रेशन। हर साल हमारे देश के कई नौजवान सुसाइड कर लेते हैं। सुसाइड किसी भी परेशानी का हल नहीं हो सकता है। इसलिए सुसाइड के ख्याल आते ही एक बार अपने मां-बाप, दोस्तों के बारे में अवश्य सोचें और अपनी परेशानी को बांटें।