निहाल सिंह बन गया देवदूत...वरना डेढ़ दर्जन व्यक्ति की और चली जाती जान..!

यमुना एक्सप्रेसवे एक्सीडेंट में 29 लोगों की जानें चली गईं, जबकि नौ लोग अभी भी जिंदगी और मौत की जंग से लड़ रहे हैं। दो घायलों को वेंटिलेटर पर रखा गया है। इस एक्सीडेंट को लाइव देखने वाला महज एक युवा था। निहाल सिंह नाम के इस युवा किसान ने इस हादसे के बाद जो तत्परता दिखाई, उसके कारण 18 जानें बच सकीं। उसने सूझबूझ से काम लिया। पुलिस को फोन किया, उसके बाद ग्राम प्रधान को सूचना दी और खुद अकेला ही बचाव कार्य के लिए आठ फीट गहरे इस नाले में कूद पड़ा।

ये बताया निहाल सिंह ने
निहाल सिंह यमुना एक्सप्रेसवे से तीन किलो मीटर दूर स्थित गांव चौगान के घड़ी रामी का रहने वाला है। निहाल सिंह ने बताया कि वह प्रतिदिन सुबह यमुना एक्सप्रेस वे की तरफ आता है। प्रतिदिन की तरह सोमवार सुबह 4 बजे वह झरना नाले के पास ही था। निहाल सिंह वहां शौच कर रहा था, तभी उसे तेज आवाज सुनाई दी। आवाज का ये क्रम लगभग 40 सेकेंड में एक जोरदार धमाके के साथ थम गया। वह कुछ समझ पाता, उससे पहले उसकी आंखों के सामने नाले में अवध डिपो की लग्जरी बस गिरी हुई थी। बस लगातार नाले के दलदल में धंसती जा रही थी।

सूझबूझ से किया काम

निहाल सिंह ने इस हादसे के पश्चात सूझबूझ के साथ काम किया। वह मौके की तरफ दौड़ा और सबसे पहले पुलिस को सूचना दी। इसके पश्चात उसने अपने गांव में इस हादसे की सूचना पहुंचाई और इसके बाद खुद नाले में कूद गया। हादसे के बाद चीख पुकार मची हुई थी। वह बस तक पहुंचा और बस के शीशे तोड़ना शुरू कर दिए। उसने बताया कि बस में से उसने पांच मिनट के अंदर ही पांच लोगों को बाहर निकालकर, किनारे तक पहुंचा दिया। इसके पश्चात वह लगातार बस में फंसे लोगों को बाहर निकालने के लिए जूझता रहा।

सबने दी शाबासी

निहाल सिंह युवा किसान है और घड़ी रामी गांव का रहने वाला है। हाईस्कूल पास निहाल सिंह ने जिस सूझबूझ के कारण इस हादसे के दौरान काम किया, उसे लेकर अधिकारियों ने तो उसे शाबासी दी ही, साथ ही गांव के लोगों ने भी उसके इस कार्य की जमकर सराहना की। यदि निहाल सिंह इस सूझबूझ और तेजी के साथ काम न करता, तो इस हादसे में और भी जानें जा सकती थीं। उसकी वजह से लगभग 18 जिंदगियां बच पाईं। क्योंकि हादसा सुबह 4.20 बजे हुआ। उस वक्त न तो यमुना एक्सप्रेसवे पर वाहनों की भीड़ थी और नाहीं आस पास कोई दिखाई दे रहा था।