हत्या के आरोपी ने अपने जगह किसी दूसरे को खड़ा कर स्वयं को नाबालिग बताया..!


लातेहार जिला में कुछ भी संभव है। एक तरफ पुलिस स्थायी गिरफ्तारी वारंट पर पकड़ने गयी हत्या के आरोपी को बगैर अदालत में पेश किये रिहा कर दिया, तो दूसरी तरफ लोक अभियोजक ने उक्त रिहाई को गलत करार देते हुए ऊपरी अदालत में अपील दायर करायी। अपील की पहली ही सुनवाई में तत्कालीन प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश राजेश कुमार वैश्य की अदालत ने लोक अभियोजक को रिहा हुए व्यक्ति को उम्र प्रमाण पत्र दाखिल करने का आदेश दिया था। तत्कालीन लोक अभियोजक सुदर्शन मांझी ने जब रिहा हुए व्यक्ति की उम्र का प्रमाण पत्र कोर्ट में दाखिल किया था तो मामले से परदा ही उठ गया था, एक बड़ी साजिश का पर्दाफाश हुआ था।
18.03.1995
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को लातेहार जिला के चंदवा थाना अंतर्गत स्थित चीरो मैनटोली ग्राम निवासी तेतरा गंझू को जमीन की लालच में उसके भाई एवं भतीजे ने आधी रात में घर से निकाल कर तेज धारदार हथियार से काट कर मर्डर कर दी थी। पुलिस ने मृतक की पत्नी पुनिया देवी के फर्दबयान पर चंदवा थाना में कांड संख्या 19/95 (धारा 302,448 भादवि) दायर कराया था। प्राथमिकी में पीड़िता ने अपने भैसुर रिसा गंझू एवं उसके बेटा रामचंद्र गंझू पर शक व्यक्त किया था। 
तफ्तीश में तत्कालीन चंदवा थाना प्रभारी रामा तिवारी ने उपरोक्त अभियुक्तों को तेतरा गंझू की हत्या का प्रथम दृष्या आरोपी पाते हुए गिरफ्तार कर अदालत में पेश किया। अदालत ने जब 19.03.1995 को आरोपी पिता-पुत्र को जेल भेज दिया। मामला का विचारण शुरू हुआ। इसी दौरान रिसा गंझू की मौत हो गयी। घटना के 16 वर्षों बाद अभियुक्त रामचंद्र गंझू के विरुद्ध अदालत ने गत 8 नवबर 2011 को स्थायी गिरफ्तार वारंट जारी किया। 
जब अदालत ने स्थायी वारंट जारी किया तब आरोपी ने घटना के 20 साल बाद अपने को नाबालिग होने का दावा पेश किया। अदालत ने मेडिकल बोर्ड का गठन किया और रामचंद्र गंझू को 18.02.2015 को किशोर घोषित किया, जिसके आधार पर 29.04.16 को उसे हत्या के आरोप से मुक्त कर दिया। अदालत में अभियोजन पक्ष ने 27.08.15 को रामचंद्र गंझू के नाबालिग होने पर संदेह भी व्यक्त किया था।