साइंस के शिक्षक का परिवार नंगे होकर 'काला जादू' कर रहा था, पुलिस आई तो पत्थर-तलवार से वार कर दिया..!

इस घटना से जुड़े कुछ वीडियो भी सामने आए हैं। इसमें घर के अंदर मौजूद लोग बिना कपड़ों के दिख रहे हैं। ये भी इसी वारदात से जुड़े एक वीडियो का फ्रेम है। ज़मीन पर दो लोग नंगे नज़र आ रहे हैं कलईगांव। उदालगुड़ी, असम. यहां बच्चों को विज्ञान पढ़ाने वाला एक अध्यापक अंधविश्वास में अजीबो-गरीब अनुष्ठान करते पकड़ा गया। और इस सबके चक्कर में उसके 28 साल के जवान बेटे को जान गंवानी पड़ी।

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जादव सहरिया गांव के हाई स्कूल में साइंस अध्यापक 6 जुलाई को पड़ोसियों ने देखा, सहरिया परिवार के घर से धुआं निकल रहा है। उनके घर के कंपाउंड में एक छोटा सा मंदिर भी है। उस मंदिर से धीमे-धीमे घंटी बजने की भी आवाज़ आ रही है। पड़ोस के लोगों को कुछ अजीब लगा। वो जादव सहरिया के घर की तरफ बढ़े। उनके मुताबिक, अंदर का नज़ारा कुछ यूं था-जादव, उनकी पत्नी पूर्णकांति, बेटा पुलकेश, पूर्णकांति की दो बहनें, इन दो बहनों में से एक का पति तथा उनका ढाई बरस का बेटा और इन सबका एक रिश्तेदार जे कलिता, सब के सब नंगे हैं। वो सब मिलकर कुछ अजीब सी हरकत कर रहे थे। कोई अजीब सा कर्मकांड। घर के अतिरिक्त परिवार के पास जो एक बाइक और कार थी, उसमें भी आग लगी हुई थी।

पुलिस ने गोली क्यों चलाई?

लोगों ने पुलिस को इत्तला दी। फायर ब्रिगेड को बुलाया। मौके पर पहुंचकर पुलिस जब जादव परिवार के घर की ओर बढ़ी, तो अंदर मौजूद लोगों ने पुलिस की टीम पर पत्थर फेंके। तलवार से उनपर हमला किया। इसी आपाधापी और हमले के बीच में एक पुलिसकर्मी ज़मीन पर गिर गया। पुलिस का कहना है कि आत्मरक्षा के लिए उन्होंने घर के अंदर मौजूद तीनों पुरुषों के पांव की तरफ निशाना करके गोली चलाई। पुलकेश की जांघ में गोली लगी। जादव और कलिता को भी गोली लगी। तीनों को अस्पताल ले जाया गया। घटना के एक दिन बाद हॉस्पिटल में इलाज के दौरान पुलकेश की मौत हो गई। बाकी दो का इलाज चल रहा है।

हमारी टीम के साथ एक एक्ज़िक्यूटिव मैजिस्ट्रेट भी थे। उन्होंने हमें हवाई फायरिंग करने की इजाज़त दी थी। बाद में स्थितियां हिंसक होने पर उन्होंने हमें तीनों पुरुषों के पैर मे गोली मारने की इजाजत दी। वो तीनों जख़्मी हो गए। उनमें से एक की अस्पताल में मौत हो गई। हमने आत्मरक्षा में गोली चलाई थी। हम अभी भी पूरा मामला समझने की कोशिश में लगे हैं। उन लोगों ने घर के अंदर सारा सामान तोड़-फोड़ दिया था और गाड़ियों में आग लगा दी थी।
कलईगांव पुलिस में OC भाबा नंदा डेका ने बताया-तीनों घायलों को फौरन गुवाहाटी के अस्पताल लाया गया। अंधविश्वास में शामिल परिवार की तीनों महिलाओं का कहना है कि तीनों पुरुषों ने उन्हें जबरन कपड़े उतारने और पूजा में बैठने को कहा था। इसके पीछे क्या वजह थी, क्या मंशा थी, ये फिलहाल मालूम नहीं चल पाया है।

तांत्रिक का चक्कर हो सकता है?

चूंकि इस घटना में घर के अंदर एक ढाई बरस का बच्चा भी उपस्थित था, तो मीडिया में कई जगह ऐसी खबरें आईं कि सहरिया परिवार बच्चे की बलि चढ़ा रहा था। लेकिन इंडियन एक्सप्रेस का कहना है कि पुलिस ने इस बलि वाली बात की पुष्टि नहीं की है। अखबार ने पड़ोसियों से बात करके बताया है कि रमेश सहारिया नाम का एक तांत्रिक इस परिवार के करीब था। पड़ोसियों को शक है कि हो सकता है इस सारी घटना के पीछे रमेश का कोई असर हो। पुलिस ने बताया कि फिलहाल ये तांत्रिक अभी फरार है। पुलिस उसे तलाश रही है। लेकिन पुलिस का ये भी कहना है कि वारदात के समय ये तांत्रिक सहरिया परिवार के घर में मौजूद नहीं थे।

अभी जून में ही असम के कामाख्या मंदिर के पास एक महिला की सिर कटी लाश मिली थी। लाश के पास पूजा-पाठ की कुछ चीजें भी मिलीं। मिट्टी का दीया, एक मिट्टी का बर्तन, कलावा, खाली प्लास्टिक की बोतल सहित कुछ और चीजें। इसके बाद शक बढ़ा कि कहीं महिला की नरबलि तो नहीं दी किसी ने। फिर गुवाहाटी पुलिस ने कहा भी कि शुरुआती जांच से नरबलि की संभावना लग रही है।