इस कुएं का पानी पीने से पैदा हो रहे हैं जुड़वां बच्चे.. जानिए आख़िर क्या है वजह..!

दोद्दिगुंटा एक सबसे छोटा सा गांव है। बता दे जिसकी आबादी 4500 है। यह गांव आंध्र प्रदेश राज्य के पूर्वी गोदावरी ज़िले के रंगमपेटा मंडल में आता है। यहां के लोगों की जीविका का मुख्य साधन कृषि ही है। बता दे गांव में केवल एक ही हाईस्कूल है। ज्यादा तर लोग खेतीबाड़ी के काम में ही व्यस्त होते हैं। यह छोटा सा गांव उस वक़्त चर्चा में आ गया जब एक निजी टेलीविज़न चैनल में दिखाया गया था। की इस गांव में उपस्थित एक ख़ास कुएं का पानी पीने से जुड़वां बच्चों का जन्म होता है। अभी हाल के समय तक यही कुआं गांव वालों के लिए पीने के पानी का एक प्रमुख स्त्रोत था। जबकि, ग्राम पंचायत की तरफ़ से कुछ वक़्त पहले ही गांव वालों के घरों में पानी की सप्लाई के लिए नल भी लगवाए थे।
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यदि कोई भी इस गांव में घूमे तो उसे बहुत से जुड़वां बच्चे सड़कों पर खेलते-घूमते दिख जाएंगे। जबकि, गांव में कितने जुड़वां लोग हैं इस बात का कोई भी आधिकारिक आंकड़ा तो मौजूद नहीं है। बता दे अदापा वेंकटेश इस गांव के सरपंच हैं। उन्होंने बीबीसी से कहा कि इस गांव में क़रीब 110 जुड़वां हैं। उन्होंने यह भी यह कहा कि कुएं के पानी के कारण ही इस गांव में इतने ज्यादा जुड़वां हैं। वो कहते हैं, "आप हमारे घर में विभिन्न आयु वर्ग के जुड़वां देख सकते हैं और इस विशेषता के कारण ही हमारा गांव मशहूर हो गया है।"

किन्तु ये सब शुरू कैसे हुआ ?
आपको बता दे "लगभफ 15 वर्ष पहले एक टीचर यहां जनगणना के लिए आंकड़े जमा करने आए थे और वो हर घर में जुड़वां को देखकर भौचक्के में पड़ गई। इसके बाद उनका इसी गांव में तबादला हो गया। जब भी उनकी पत्नी ने बच्चों को यहां जन्म दिया तो वो भी जुड़वां ही थे। बता दे उन्होंने ही यह ख़बर स्थानीय मीडिया को दी कि उनकी पत्नी ने कुएं का पानी पिया था जिसके कारण उनके घर में जुड़वां बच्चों का जन्म हुआ है। और बस यहीं से हमारे गांव का नाम सुर्ख़ियों में आ गया।" अब तो आलम यह है कि केवल इसी गांव के नहीं बल्कि दूसरे गांवों और ज़िलों से भी लोग यहां के कुएं का पानी लेने के लिए आते हैं। हैदराबाद से इस गांव का पानी लेने आईं अनिता ने बीबीसी को यह बताया "हमारी शादी को चार साल हो चुके हैं।
हम कई डॉक्टरों से मिल चुके हैं किन्तु अभी कुछ नहीं हुआ। हम प्रयास करने आए हैं कि शायद किस्मत हमारा साथ ही दे दे। हम यहां से दो कनस्तर पानी लेकर जा रहे हैं।" लक्ष्मी इसी गांव में रहती हैं और नौ महीने पहले ही उन्होंने जुड़वां बच्चों को ही जन्म दिया है। बता दे की लक्षमी को पूरा विश्वास है कि गांव में उपस्थित इस कुएं के पानी को पीने के कारण ही वो जुड़वां बच्चों की मां बनी हैं। इसके अलावा वो इस बात पर भी ज़ोर देकर कहती हैं कि यह पानी कई बीमारियों को भी दूर करने वाला है। वो यह भी बताती हैं कि इस गांव में कई परिवार ऐसे भी हैं जिनके घर नल लगा हुआ है किन्तु वे इसी कुएं का पानी पीना पसंद करते हैं।
वहीं दूसरी ओर तर्क देने वाले और चिकित्सा विशेषज्ञ ऐसे किसी भी दावे को सिरे से ख़ारिज करते हैं। बता दे जन विजनाना के उपाध्यक्ष और तर्कवेत्ता छल्ला रवि कुमार ऐसी बातों से साफ़ इनक़ार कर दिया हैं। वो यह कहते हैं, "इस बात का कोई भी वैज्ञानिक तर्क मौजूद नहीं है कि इस कुएं का पानी पीने से गर्भधारण करने में सहायता मिलती है। बता दे पानी हाइड्रोजन और ऑक्सीजन और कुछ लवणों का मिश्रण है। कैल्शियम कार्बोनेट, आयरन और कैल्शियम पानी में होते हैं किन्तु इससे गर्भ धारण करने में तो कोई भी सहायता नहीं होती।" वो कहते हैं, "हां ये हो सकता है कि इससे कुछ भी बीमारियां दूर हो जाती हों। यदि किसी कुएं का पानी जुड़वां बच्चों को जन्म देने में सहायता करे तो गांव में ऐसा कोई जोड़ा ही न हो जिसके बच्चे ना हों। इस बात की पुष्टि के लिए कोई भी प्रमाण मौजूद नहीं है।"

पानी और गर्भधारण करने के बीच कोई भी संबंध नहीं

आपको बता दे स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. पद्मजा का यह कहना है कि इस धारणा के पीछे कोई भी सच्चाई नहीं है कि कुएं का पानी पीने से जिन लोगों की संतान नहीं होता है उन्हें संतान हो जाएगी और पानी पीने से जुड़वां बच्चे पैदा हो जाएंगे। उनका यह कहना है कि "जीन और वंशानुगत कारक जुड़वां बच्चों के जन्म के लिए ज़िम्मेदार होते हैं।" वो कहती हैं "गर्भधारण करने के दौरान ही महिला का यूटेरस एक से कहीं अधिक अंडाणु मुक्त करता है और इसके कारण जुड़वां बच्चों का जन्म होता है। इसके अलावा गर्भधारण करने की क्षमता और उम्र का भी इसमें विशेष योगदान होता है। ये पूरी तरह अवैज्ञानिक है कि पानी पीने से जुड़वां बच्चों का जन्म होता है।"