घर से हंसी-खुशी विद्यालय के लिए निकली थी, घर वापस पहुँची 'गोल्डन गर्ल' का खून से लथपथ लाश...!

देहरादून में डंपर की चपेट में आकर हादसे का शिकार हुई मानसी अपने परिवार में तीन भाई-बहनों में सबसे छोटी तथा सबकी लाडली थी। मानसी अपने पहले स्कूल में गोल्डन गर्ल के नाम से फेमस थी। मानसी के चेहरे की मुस्कराहट गुरुवार को गांव के हर शख्स को याद आ रही थी। सुबह स्कूल जाने के लिए मानसी घर के बाहर खड़ी थी। आसपास रहने वाली कई महिलाओं ने उसकी चोटियां देखकर प्यार से कहा कि आज मानसी सज संवरकर विद्यालय जा रही है। लेकिन, किसे पता था कि मासूम मानसी अब कभी नहीं लौटेगी।
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वह पढ़ाई के साथ-साथ खेलों में भी खासी रुचि रखती थी। स्कूल के प्रिंसिपल उसकी प्रशंशा करते नहीं थक रहे हैं। उनके अनुसार स्कूल का हर शिक्षक मानसी के चले जाने से आहत है। मानसी ने 10वीं तक की पढ़ाई भूढपुर स्थित ज्ञान आइंस्टीन स्कूल से की थी। वहां के प्रिंसिपल आरएन सेमवाल का कहना है कि मानसी पढ़ाई में काफी होनहार थी। उसके प्रत्येक विषय में 85 से अधिक अंक थे। पढ़ाई के साथ-साथ वह एक अच्छी एथलीट भी थी।
उन्होंने बताया कि स्कूल की हर प्रतियोगिता में उसका प्रथम स्थान आता था। उसके चले जाने से हर कोई दुखी है। चूंकि, आइंस्टीन स्कूल 10वीं तक है तो उसने 11वीं में दाखिला अपने घर के पास न्यू एरा एकेडमी में लिया था। मानसी का पढ़ाई में फोकस गणित और विज्ञान पर अधिक रहता था। उसके भाई बहन भी इसी स्कूल से पढ़े हैं। सेमवाल का कहना है कि मानसी को स्कूल हमेशा याद करेगा। वह हमारे स्कूल की गोल्डन गर्ल थी।
गणेशपुर की एक महिला का कहना था कि बुधवार को डेढ़ माह की छुट्टी के पश्चात स्कूल खुले थे। स्कूल में मानसी का दूसरा दिन था। गांव से स्कूल जाने वाला हर बच्चा खुश नजर आ रहा था। मानसी का चेहरा भी फूल सा खिला हुआ था। मां ने मानसी की दो चोटियां बनाईं थी, जो उसके चेहरे पर चार चांद लगा रहीं थी। महिला का कहना था कि पहले बहुत कम उसे दो चोटियों में देखा था तो हर किसी की नजर मानसी पर पड़ रही थी। मगर, कुछ ही देर बाद हादसे की खबर मिली। मासूम मानसी खून से लथपथ कपड़े में लिपटी हुई थी। कई महिलाओं ने जब उसका चेहरा देखा तो हैरान रह गईं। हादसे में मानसी का शरीर क्षत विक्षत हो गया था।