पुलिस के सीसीटीवी फुटेज न मौजूद करवाने से बीच में लटकी न्यायिक जांच..!

लगभग दो माह पहले यहां के सीआइए स्टाफ की हिरासत में हुई नौजवान जसपाल सिंह की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत व उसकी लाश को खुर्दबुर्द करने के मामले में चल रहे न्यायिक जांच अधूरे में लटकी हुई है। जिला व सेशन जज के आदेश पर केस की जांच कर रहे सीजेएम टीपीएस रंधावा की अदालत द्वारा जिला पुलिस से कई बार सीआइए स्टाफ में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज मांगी जा चुकी है मगर पुलिस ने फुटेज तो उपलब्ध करवा दी लेकिन उपलब्ध करवाई जा रही तीन कैमरों में दो की फुटेज नहीं चल रही। इसके पश्चात अदालत ने एक बार फिर से जिला पुलिस को पत्र लिखकर फुटेज दोबारा उपलब्ध करवाने की हिदायतें दी है।

 ये है मामला
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मुक्तसर के गांव पंजाबा निवासी जसपाल सिंह, बीती 16 मई को यहां के गांव संगराहूर स्थित अपने ननिहाल आया हुआ था और अपने दो मित्रो के बुलावे पर 18 मई की शाम गांव रत्तीरोड़ी के गुरूद्वारा साहिब में पहुंचा था। उसी रात सीआईए स्टाफ के इंचार्ज इंस्पेक्टर नरिन्द्र सिंह ने उसे वहां से हिरासत में लिया और बिना किसी केस व कसूर के सीआईए स्टाफ की लॉकअप में बंद कर दिया। उसी रात सीआईए स्टाफ जसपाल सिंह की संदिग्ध मौत हुई तथा अगले दिन 19 मई को सूर्य उदय होने से पहले सुबह 4 बजे ही सीआइए स्टाफ के इंचार्ज इंस्पेक्टर नरिन्द्र सिंह ने अपने दो साथियों सुखमंदर सिंह व दर्शन सिंह के साथ मिलकर उसकी लाश को ही खुर्दबुर्द कर दिया और उसी दिन सूर्य ढलने से पहले शाम 5 बजे इंस्पेक्टर नरिन्द्र सिंह ने खुद को गोली मार कर आत्महत्या कर ली थी। इस प्रकरण में पुलिस का दावा है कि जसपाल सिंह ने सीआइए स्टाफ के लॉकअप में फंदा लगाकर जान दे दी थी और उसके शव को इंस्पेक्टर नरिन्द्र सिंह ने अपने दो साथी मुलाजिमों सुखमंदर सिंह व दर्शन सिंह के साथ मिलकर राजस्थान नहर में फेंक दिया था।
इस केस में पुलिस ने सुखमंदर सिंह व दर्शन सिंह के अतिरिक्त मृतक जसपाल सिंह के कुछ करीबियों को भी गिरफ्तार किया था लेकिन उसका शव बरामद नहीं करवा पाई। इस मामले को लेकर कई दिनों तक पीड़ित परिवार द्वारा एक्शन कमेटी की अगुवाई में एसएसपी दफ्तर के बाहर धरना भी दिया गया और बाद में पुलिस ने परिवार को 5 लाख रुपये का मुआवजा देकर धरना खत्म करवा दिया। इसी विवाद के बीच 27 मई को जिला व सेशन जज ने जसपाल की मौत के मामले में सीजेएम को न्यायिक जांच के आदेश दिए। जांच के तहत सीजेएम द्वारा सीआइए स्टाफ का जायजा लिया गया और केस में गिरफ्तार सीआईए मुलाजिमों सुखमंदर सिंह व दर्शन सिंह के ब्यान दर्ज किए गए। इसके पश्चात सीजेएम ने जिला पुलिस ने केस से सबसे अहम सुबुत सीआइए स्टाफ में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज मांगी गई जोकि अभी तक पुलिस ने उपलब्ध नहीं करवाई है। सीजेएम की अदालत ने सबसे पहले 4 जून को एसपी(एच) को लिखित आदेश देकर 18 मई 2019 की सुबह 10 बजे से 19 मई 2019 की शाम 6 बजे तक की फुटेज मांगी थी। हालांकि लगभग डेढ़ माह बाद 18 जुलाई को पुलिस ने फुटेज तो उपलब्ध करवा दी लेकिन तीन में से दो कैमरों की फुटेज खुली ही नहीं जिसके बाद अदालत ने इन दोनों कैमरों की फुटेज दोबारा देने के आदेश दिए हैं।

 जिला पुलिस कर रही पूरा सहयोग
इस मामले में एसपी(एच) भूपिदर सिंह ने कहा कि जिला पुलिस द्वारा न्यायिक जांच में पूरा सहयोग दिया जा रहा है तथा सीजेएम की अदालत द्वारा मांगे गए सभी सुबूत व फुटेज उपलब्ध करवा दिए गए। अगर फुटेज नहीं चल रही तो उसमें कोई तकनीकी खामी हो सकती है जिसे दोबारा चेक करवाया जा रहा है और अगले 24 घंटे में सारे सुबुत उपलब्ध करवा दिए जाएंगे।