पेड़ पर एकाएक उभरी साई बाबा की आकृति, दर्शन को लगी लोगो की भीड़..!

भारत एक ऐसा देश हैं जहां लोगो की भावनाएं काफी संवेदनशील होती हैं। खासकर जब धर्म की बात आती हैं तो इनकी आस्था बहुत प्रबल होती हैं। ऐसे में कई बार देश के विभिन्न हिस्सों में धर्म या भगवान से जुड़े चमत्कार की खबरे भी वायरल होती रहती हैं। इसी कड़ी में इन दिनों इंटरनेट पर एक विडियो बड़ा तेजी से वायरल हो रहा हैं। इस विडियो में पेड़ के ऊपर साई बाबा की आकृति उभरी हुई दिखाई दे रही हैं। इस अनोखे चमत्कार को देखने और साई बाबा के दर्शन करने के लिए लोगो की बहुत भीड़ भी जमा हैं। ऐसे में सवाल ये उठता हैं कि क्या ये सच में कोई चमत्कार हैं या फिर मामला कुछ और हैं? जवाब जानने के लिए खबर पढ़ते जाए।
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ये पूरा मामला हरियाणा के अंबाला शहर की रेलवे कॉलोनी के वार्ड 8 का बताया जा रहा हैं। यहां के एरिया में एक काफी पुराना ‘जंगल जलेबी’ का पेड़ हैं। इस पेड़ के तने में साई बाबा का चेहरा उभरा हुआ दिखाई दे रहा हैं। इसे सबसे पहले यहां खेल रहे बच्चों ने देखा हैं। इसके बाद उन्होंने इसकी सुचना अपने परिजनों को दी। बस फिर क्या था ये खबर फटाफट आग की तरह फ़ैल गई। इसके पश्चात पेड़ के तने में बने साई के दर्शन के लिए लोगो की लाइन लग गई। दूर दूर से लोग इन साई बाबा के दर्शन के लिए आने लगे। लोगो ने वहां भजन कीर्तन करना शुरू कर दिए। हर कोई इसे बाबा का चमत्कार मानने लगा। कोई बाबा को चढ़ाव चढ़ा रहा हैं तो कोई पूजा पाठ करने लगा।
चुकी ये मामला लोगो की आस्था से जुड़ा हुआ था इसलिए साई बाबा की इस आकृति की रक्षा करने के भी इंतजाम किये गए। भक्तों ने साई बाबा के आसपास डंडे गाड़ दिए तो वहीं रेलवे प्रशासन ने आरपीएफ कर्मचारियों को ड्यूटी पर लगा दिया। सभी की यही कोशिश हैं कि कोई भी साई बाब की इस आकृति के साथ छेड़खानी ना कर सके।

क्या सच में हैं चमत्कार?
21वीं सदी में इस प्रकार के चमत्कार पर बहुत कम लोग ही विश्वास करते हैं। ऐसे में इस घटना के उपर भी सवाल उठाना शुरू हो गए। चश्मदीद रामदीन ने बताया कि इस पेड़ के पास रोजाना एक आदमी आ रहा था, ये उस पेड़ के एक खोखले भाग में कोई हरकत कर रहा था। ऐसे में शायद उसी आदमी ने साई बाबा की ये आकृति बनाई होगी। दरअसल इस पेड़ के पास बने पुराने रेलवे क्वार्टर को तोड़ नए क्वार्टर बनाने का काम चल रहा था।
रामदीन यहीं लेबर वर्क कर रहा था। अंबाला डीआरएम दिनेश चंद्र शर्मा का कहना हैं कि 21वी साड़ी में ऐसा कुछ होना मुमकिन नहीं हैं। इस पेड़ के नजदीक ही पीछले डेढ़ माह से काम चल रहा था, उन लोगो को तब पेड़ पर ऐसा कुछ नहीं दिखा। कोई भी व्यक्ति रेलवे की जमीन पर अतिक्रमण नहीं कर सकता हैं, अगर जरूरत पड़ी तो हम पुरातत्व विभाग से जांच भी करवाएंगे।