जब जीबी रोड से छुड़ाई गई लड़की को नौकरी नहीं मिली तो करने लगी यह कार्य..!

दिल्ली पुलिस ने जीबी रोड पर छापेमारी कर एक नेपाली युवती को मुक्त कराया, जिसे समाज कल्याण विभाग ने प्रशिक्षण दिया। उसे नौकरी नहीं मिली तो वह आठ अन्य लड़कियों के साथ कोलकाता भाग गई तथा फिर से देहव्यापार के दलदल में उतर गई। बीते 27 अप्रैल को कोलकाता पुलिस ने युवती को मुक्त कराकर दिल्ली पुलिस को सौंपा। अब वह अपने दादा के साथ अपने देश जाने पर अड़ी है। बालिग होने के कारण हाईकोर्ट ने उसे अपने मन की सुनने की आजादी दे दी है। यह कहानी नेपाल की उस लड़की की है, जो 1 दिसंबर 2018 की रात दिलशाद गार्डन स्थित सरकार के संस्कार आश्रम से आठ लड़कियों के साथ फरार हो गई थी। यहां से वे सीधे सोनागाछी के कोठे पर पहुंच गईं।

पांच वर्ष पहले नेपाल से आई थी दिल्ली 
जस्टिस मनमोहन और संगीता डी. सहगल की पीठ के समक्ष लड़की ने कहा कि वह पांच वर्ष पहले नेपाल से आकर गाजियाबाद के लोनी में रहने लगी, लेकिन उसे जीबी रोड स्थित कोठे पर पहुंचा दिया गया। यहां पर उसने चार साल बिताए। नवंबर, 2017 में पुलिस ने कोठे से मुक्त कराया, जहां से उसे तिहाड़ जेल स्थित नारी निकेतन भेज दिया गया।

दादा के साथ नेपाल जाना चाहती है
लड़की ने हाईकोर्ट को बताया कि अब वह अपने दादा के साथ नेपाल जाना चाहती है। न्यायाधीशों ने उससे चैम्बर में बात भी की, मगर वह नेपाल जाने पर अड़ी रही। दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष स्वाति मालीवाल ने हाईकोर्ट को बताया कि लड़की को नौकरी का प्रस्ताव दिया गया है। शायद वह बाद में मान जाए।

समाज कल्याण विभाग ने कराया था प्रशिक्षित

नेपाली युवती को नारी निकेतन से जून, 2018 में 13 अन्य लड़कियों के साथ समाज कल्याण विभाग व एक गैर सरकारी संगठन द्वारा संचालित संस्कार आश्रम दिलशाद गार्डन भेज दिया गया। यहां उसे सुरक्षा गार्ड का प्रशिक्षण दिया गया। उसने डेढ़ महीने तक जीटीबी अस्पताल में नौकरी भी की। लेकिन उसके बाद तीन माह तक नौकरी नहीं मिली। वह अन्य लड़कियों के साथ 1 दिसंबर, 2018 की रात को आश्रम से फरार हो गई और लोनी में एक लड़की के पास गई। दो दिन बाद एक अन्य लड़की के साथ सोनागाछी चली गई।