अगर पीएम ने शौचालय का पैसा ना भेजा होता तो ये व्यक्ति ज़िंदगी भर ही गुलाम रह जाता..!


आपको बता दे भारत का चंद्रयान लॉन्च हो चुका है। आसमान के पुरोधा बता रहे हैं कि दूर अंतरिक्ष में चंद्रयान अपने रास्ते पर है। जबकि सब ठीक-ठाक है। धरती से कई हज़ार किलोमीटर दूर। भारत के सपने दुनिया को ही मुंह चिढ़ा रहे हैं। सस्ता सुभीता मिशन। जबकि दुनिया भर की नज़र हम पर है। हमारी नज़र ब्रह्माण्ड निहार रही है। जबकि ये ख़बर ना तो चंद्रयान के बारे में है, और ना ही ब्रह्माण्ड के बारे में है। वो अभी हमसे आपसे बहुत दूर है। आपको बता दे यूपी का एक ज़िला है जालौन। जालौन से 55 किलोमीटर दूर है गड़ेरना गांव। थाना पड़ता है रेढ़र। यहां रहते हैं रामजी विश्वकर्मा. ये ख़बर रामजी विश्वकर्मा के बीस बरसों की ग़ुलामी की ख़बर है। जबकि बीस बरस बंधुआ मज़दूरी, वो भी महज़ 6 हज़ार रुपयों के लिए।
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आपको बता दे इलाज हो गया। रामजी पर दस हज़ार का क़र्ज़ चढ़ गया। जबकि तब शायद रामजी को इस बात का भी इल्म नहीं था कि ये दस हज़ार उनके लिए ‘सवा सेर गेंहूं’ साबित होगा। जब मूलधन की चक्की घूमी तो ब्याज का अनंत आंटा निकलने लगा। रामशंकर बुधौलिया ने रामजी विश्वकर्मा को रख लिया अपने पास। बहैसियत बंधुआ मज़दूर। तब साल 1999 था। जबकि आज साल 2019 है। बता दे बीस बरस तक रामजी अपने मूलधन की चक्की पीसते रहे। रामशंकर बुधौलिया इलाक़े के और बड़े नेता बने। बाद में ज़िला पंचायत सदस्य भी हुए। जबकि रामजी कुछ नहीं हुए। वो रामशंकर के घर मजदूरी करते रहे। दिन-रात खाने में नमक कम और गाली ज़्यादा। रोटी कम और मार ज़्यादा खाते रहे। 1999 में हमारा आदमी बीमार पड़ा। तभी रामशंकर बुधौलिया से 6 हज़ार रुपया लिया। उधार चुकाने के नाम पर रामशंकर ने हमारे जेठ को अपने यहां बंधुआ रख लिया। बता दे साल भर बाद जब छुड़ाने पहुंची तो हमें ललकार के भगा दिया। वह बोलने लगे कि अभी हमारा पैसा नहीं पटा। लेकिन फिर इनको कई साल तक घर नहीं आने दिया।
बिटिया की शादी में एक बार 5 हज़ार, और एक बार फिर कभी 5 हज़ार दिया। उसका ब्याज अपने ही मन से जोड़ने लगे। फिर हमें शौचालय के लिए सरकार से 6 हज़ार रुपए मिले। तब हमने दौड़ धूप करनी शुरू की फिर से बीस साल बाद। वहां थाने में जाने को बोला। बता दे थाने से दरोगा जी छुड़वा के लाए। जबकि हमसे वह दो जगह अंगूठा लगवाया। 26 जून 2019 को पूरा दिन हमारे जेठ को थाने में रखा। रात को छोड़ा। आपको बता दे केशकली से जब हमने यह पूछा कि अब क्या चाहती हैं? तो उस तरफ़ से कोई भी जवाब नहीं आया। बता दे एक लंबी सांस के बाद फूट-फूट के रोने की आवाज़ आई। हमारे लाख हिम्मत दिलाने पर भी केशकली रोए जा रही थीं। ये रोना सिर्फ़ केशकली का रोना नहीं था। इस महादेश के अनगिनत उन लोगों का रोना इसमें गुंथा हुआ था, जिन्हें कुछ लोगों का इंसान मानने का दिल ही नहीं करता। हमारी इस पुण्य-भूमि पर जाने कितने रामजी, जाने कितने रामशंकरों के यहां बंधुआ हैं। आज़ादी का ख़्वाब देखते होंगे।
केशकली जब भी रामशंकर बुधौलिया के पास जातीं थी, तो सामने हिसाब की कॉपी पटक दी जाती। अभी व्याज मिलाकर तीन लाख का हिसाब बैठता है। वो दे जाओ, रामजी को ले जाओ.’ उन्हें यह भी पता था कि ना पैसे जुटेंगे और ना रामजी छूटेंगे। हर बार अलग ही हिसाब बताया जाता है। बता दे केशकली पढ़ी लिखी नहीं हैं। जबकि वह हिसाब समझ ही नहीं पाई। कि किस हिसाब से कुछ हज़ार रुपए तीन लाख बन गए। जबकि रामजी बीस सालों तक लगातार बुधौलिया के यहां काम करती है। 2019 में जब शौचालय के लिए 6 हज़ार की रक़म सरकार से मिली तब बात बनी। बता दे इसी पैसे के भरोसे केशकली फिर बुधौलिया के पास गईं। पुलिस रामजी को छुड़ा लाई है। हमारी यह बात रामशंकर बुधौलिया से भी हुई। बातचीत में बुधौलिया ने केशकली और रामजी के सारे आरोपों से इंकार किया है। उनका यह भी कहना है कि कुछ राजनैतिक विरोधियों ने उनके खिलाफ़ साज़िश की है ताकि उनकी इमेज पब्लिक में ख़राब की जा सके.जालौन SSP बीमार चल रहे हैं।
जबकि हमने जालौन के ASP से बात किया। उनसे जब यह पूछा कि क्या आपको इस मामले की जानकारी है? जवाब आया ‘नहीं.’ उनका यह कहना है कि ‘आप लोग बता रहे हैं तो जानकारी हो रही है। पीड़ित से कहिए कि मुक़दमा लिखा दें। हम आगे कार्यवाही करेंगे’ आपको बता दे केशकली अपने जेठ रामजी को वापस तो ले आईं। जबकि उन्हें सरकार की तरफ़ से भेजे शौचालय के पैसे ख़त्म हो गए। केशकली बताती हैं कि इलाके के मज़बूत लोगों ने मामले को निपटाने के लिए रामशंकर बुधौलिया से उन्हें 10 हज़ार रुपए दिला दिए। हो गया सारा हिसाब साफ़। हमारा संविधान रामजी विश्वकर्मा के दरवाज़े तक नहीं पहुंच पाया। बता दे दिल्ली से कुछ सौ किलोमीटर की दूरी। रामजी विश्वकर्मा का हक़, उसके जीने का अधिकार कौन से रॉकेट में भेजें कि पुलिस थाने की देहरी पर खड़ी उनके घर की एक औरत के पांव ना कांपे।