विकलांग सैनिकों के विषय में बीजेपी क्या सोचती है? इसे पढ़कर पता चल जाएगा..!

विकलांग सैनिकों के पेंशन के मसले पर अब बवाल अधिक बड़ा हो गया है। इस बवाल की जड़ केंद्र सरकार के इस फैसले में है कि सैनिकों को मिलने वाले इस पेंशन पर अब इनकम टैक्स लगेगा। इस मामले में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का एक इन्टरनल नोट ट्विटर पर सामने आया है। इस नोट में सीतारमण के हवाले से कहा गया है कि विकलांग सैनिकों को मिलने वाली पेंशन पर टैक्स लगाने का निर्णय सही है। इन्टरनल नोट क्या होता है? मंत्रियों की अधिकारियों और दूसरे मंत्रियों से बंद कमरे में बातचीत का ब्यौरा।।अपने इस नोट को निर्मला सीतारमण ने अपने ट्विटर हैंडल से शेयर किया। नोट में निर्मला सीतारमण ने पेंशन पाने वाले विकलांग सैनिकों के बारे में और बातें भी कही हैं।

निर्मला सीतारमण ने इस नोट में कहा है,

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“कुछ बेईमान कर्मचारियों ने सिस्टम का बहुत शोषण किया है जिन्होंने विकलांग फौजियों को मिलने वाले सरकारी लाभ प्राप्त किए हैं। हाल के वर्षों में सैन्य बलों के कर्मचारी अपनी कुछ बीमारियों को विकलांगता दिखाकर टैक्स में छूट लेते देखे जा रहे हैं।”

पहले जान लीजिये मसला क्या है?

जो सैनिक अपने सेवाकाल के दौरान किसी कारण विकलांग हो जाते हैं, उन्हें विकलांग पेंशन दिया जाता है। केंद्र सरकार की योजना है कि इस पेंशन को भी आयकर के दायरे में लाया जाए। ये मसला 27 जून को लोकसभा में विपक्ष ने उठाया था। काफी हंगामा हुआ। कांग्रेस के सांसद अध्यक्ष के पास जाकर नारेबाजी करने लगे। कांग्रेस सांसदों ने कहा कि 24 जून को सरकार ने एक सर्कुलर निकालकर विकलांग सैनिकों को मिलने वाले पेंशन पर टैक्स लगा दिया है।

हल्ला हुआ तो संसदीय कार्यमंत्री अर्जुनराम मेघवाल ने कहा कि रक्षामंत्री इसका जवाब देने के लिए तैयार हैं। राजनाथ सिंह ने जवाब दिया कि सामाजिक तैयारियों तथा सेनाओं के हितों को मजबूती प्रदान करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में से एक है। निर्मला सीतारमण का इंटरनल नोट सामने आने के बाद ये देखा जा रहा है कि भाजपा सरकार इस मामले पर कोई भी यू-टर्न लेने के मूड में नहीं है। विकलांग सैनिकों को मिलने वाले पेशन पर इनकम टैक्स लगकर रहेगा, ऐसा माना जा रहा है।

इस नोट में निर्मला सीतारमण ने“अनस्क्रुपुलिस” शब्द का इस्तेमाल किया है, जिसका फौरी अर्थ “बेशर्म” होगा। और अनुवाद करते हुए बात करें तो निर्मला सीतारमण ने कहा है कि कुछ बेशर्म लोगों ने विकलांग सैनिकों को दिए जाने वाले पेंशन का गलत लाभ  उठाया है। सीतारमण ने कहा है कि अपने सेवाकाल में वास्तव में विकलांग हुए लोगों में कोई भेदभाव नहीं किया जाएगा, भले ही उनकी विकलांगता किसी भी तरह की क्यों न हो। उन्होंने यह भी कहा है कि यदि कोई शख्स इस योजना का गलत तरीके से इस्तेमाल करता है तो मामले की जांच की जाएगी। और कार्रवाई की जाएगी।

अब सरकार इस मसले पर बैकफुट पर जा रही है।


निर्मला सीतारमण ने अपने नोट में यह भी लिखा है कि वर्षों से दिए जा रहे करमुक्त विकलांग पेंशन के मामले में यह देखा गया है कि रहन-सहन के कारण होने वाली बीमारियों के लिए भी सैनिक इस पेंशन की सुविधा ले रहे हैं। अगर इस ट्रेंड पर रोक नहीं लगाई गयी तो ये एक चिंता का विषय है। और चलते-चलते निर्मला सीतारमण देश की सुरक्षा का मसला भी बीच में  लेकर आती हैं। उन्होंने कहा है कि जब देश की सुरक्षा को चुनौतियां दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही हों, उस वक्त आर्मी के लिए विकलांग लोगों का इतनी बड़ी संख्या में रैंक और फाइलों में होना मुनासिब नहीं है। इंडियन आर्मी ने भी निर्मला सीतारमण की बात का समर्थन किया है। आर्मी ने ट्वीट किया है,

“भारतीय सेना अपने उन सभी स्टाफ को लेकर फिक्रमंद है, जो नौकरी के दौरान युद्ध या अन्य कारणों से बाहर हो गए हैं। ऐसे लोगों के लिए हम अतिरिक्त सहायता चाहते हैं। साथ ही हम उन लोगों का उत्साह कम करना चाहते हैं, जो अपनी विकलांगता की वजह से वित्तीय लाभ पाना चाहते हैं।”विकलांग सैनिकों के पेंशन पर लम्बे समय से बहस होती रही है। विपक्ष के सरकार पर यह आरोप है कि सैनिकों के नाम पर राजनीति करने वाली सरकार क्या विकलांग सैनिकों के पेंशन को करमुक्त नहीं कर सकती है?