पुलिसकर्मी अपनी दुधमुंही बेटी को ऑफिस लेकर गई तो उसको सस्पेंड कर दिया गया, जानिये क्या था मामला..!

आपको बता दे विमेन पॉवर लाइन '1090' को महिलाओं की सुरक्षा के लिए बनाया गया था। उत्तर प्रदेश के अखिलेश यादव की सरकार ने वर्ष 2012 में इसका गठन किया था। बाकी महिलाओं की बात तो छोड़िये, जबकि, यहां पर काम करने वाली महिला सिपाहियों की सुरक्षा ही खतरे में है। हमारा अर्थ उनकी जॉब सिक्योरिटी से है।
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दोस्तों यहां एक सिपाही महिला को केवल इसलिए सस्पेंड कर दिया गया क्योंकि वह अपनी दुधमुंही बच्ची को लेकर ड्यूटी पर आई थीं। बता दे इस सिपाही का नाम सुचिता सिंह है। वह बच्ची को घर पर छोड़कर आ नहीं सकती थी, न ही उसे छुट्टी मिली। इस लिए वह बच्ची को लेकर ऑफिस आ गई। इसके कारण उन्हें सस्पेंड कर दिया गया। बता दे सुचिता सिंह ने इसकी शिकायत DGP ऑफिस में की। अभी फिलहाल शिकायत की जांच चल रही है।
गौर करने वाली बात यह है कि 1090 के सेंटर की ADG एक महिला ही हैं। बता दे खैर, हेड महिला हो या पुरुष। किसी भी महिला के साथ यदि इस प्रकार का व्यवहार होता है तो ये बेहद ही शर्मनाक है। ऐसा ही एक मामला लगभग एक वर्ष पहले भी आया था। अर्चना जयंत नाम की एक महिला सिपाही की फोटो वायरल हुई थी। बता दे इस फोटो में सिपाही की 6 वर्ष की बेटी टेबल पर सोई थी। और जयंत वहीं चेयर पर बैठकर काम कर रही थीं। जबकि, उस केस में डीजीपी ने सिपाही का सम्मान किया था। और उनको उनके घर के नजदीक ही पोस्टिंग भी दे दी गई थी। उनको 'मदर कॉप' की उपाधि भी दिलाई गई थी। किन्तु अब जब सुचिता अपनी बेटी को लेकर काम करने आईं तो उन्हें तुरन्त सस्पेंड कर दिया गया।
वहीं इस पूरे मामले पर '1090' की एडीजी अंजू गुप्ता ने यह कहा, 'सुचिता अपने बच्चे को लेकर ऑफिस आती थीं। बता दे चूंकि बच्चा छोटा था तो ऑफिस में ही रोता-चिल्लाता था। जिससे बाकी कर्मचारियों को काम करने में परेशानी पड़ती थी। बता दे इस बात को लेकर सुपरवाइजर ने उनको रोका किन्तु उन्होंने बात नहीं मानी। फिर यह मामला मेरे पास आया। मैंने उनको बच्ची की देखभाल के लिए छुट्टी लेने को भी कहा किन्तु उन्होंने मना कर दिया। उसके बाद मुझे ऐसा कदम उठाना पड़ा।' औरत का बच्चा यदि रोता है तो संस्थान का काम औरत को क्रेश जैसी सुविधाएं देना है या उसे छुट्टी पर भेज देना है ?