थाने पहुंच DGP ने कहा, सिपाही हूं... आरा से आया हूं... केस में पैरवी करानी..!

डीजीपी गुप्तेश्वर पांडेय पटना से कैपिटल एक्सप्रेस से नवगछिया आए थे। स्टेशन पर उतरकर सबसे पहले जीआरपी थाने गए। वहां जवानों से पूछा, नवगछिया नगर थाना किधर है। इसके पश्चात अपना बैग और बॉडीगार्ड वहीं छोड़कर पैदल ही निकल गए। स्टेशन से नवगछिया थाने की दूरी 1.5 किमी है। रास्ते में लोगों से थाने का पता पूछते हुए डीजीपी आगे बढ़ते गए। बीच में एक बाइक सवार ताइक्वांडो का राष्ट्रीय खिलाड़ी जेम्स मिला, उसकी बाइक पर बैठ कर नवगछिया थाने पहुंचे। नवगछिया थाने में उस समय चौकीदार कुर्सी पर बैठकर नीम के दातुन से मुंह धोता मिला। एएसआइ राघव थाना परिसर में गुटका फांकते और मोबाइल पर बतियाते हुए मिला। चौकीदार के पास खड़े होकर डीजीपी बोले, भईया, सिपाही हूं। आरा जिले से आया हूं। एक केस में पैरवी करानी है। कैसे होगा, कितने पैसे लगेंगे और कहां देना होगा। कुर्सी पर बैठे-बैठे चौकीदार बोला, बड़ा बाबू को आने दीजिए। इसके पश्चात उन्होंने एक ग्लास पानी मांगा।

युवक के कंधे पर हाथ रखकर थाने आने का कारण पूछा
loading...
थाने में बैठे एक युवक से गलबहियां करते हुए डीजीपी ने उससे थाने आने का कारण पूछा। चौसा के उक्त युवक प्रदीप यादव ने बताया कि मेरा तीन दिनों पूर्व चौसा के मुरली चौक से अपहरण हो गया था, मैं अपहरणकर्ताओं के चंगुल से भाग कर यहां पहुंचा हूं। इसपर डीजीपी ने मधेपुरा एसपी संजय शर्मा को मोबाइल लगाया तथा जानकारी दी कि आपके यहां से अपह्रत युवक नवगछिया में टहल रहा है।

15 मिनट बाद पता चला कि उक्त सिपाही बिहार का डीजीपी है
इसी बीच पत्रकारों की भीड़ थाने पहुंच गई। यह देख थाने के पुलिस कर्मियों को यह समझते देर नहीं लगी कि खुद को सिपाही बताने वाला यह व्यक्ति बिहार का डीजीपी है। इसके बाद तो मानो सभी पुलिस कर्मियों को सांप सूंघ गया हो। सभी डीजीपी की आवोभगत में लग गए। डीजीपी ने पत्रकारों से एसडीपीओ प्रवेंद्र भारती को फोन लगाने को कहा। फोन व्यस्त बता रहा था।
डीजीपी थाना परिसर में ही स्थित महिला थाने की ओर बढ़ गए। थाने का गेट लगा था। बोले, ऐसे थाने की क्या जरूरत है। अंदर जाकर स्टेशन डायरी चेक किया। 46 घंटे से डायरी पेंडिंग थी। फिर एससीएसटी थाने गए। यहां भी डायरी 16 घंटे से पेंडिंग मिली। दोनों थानेदार भी छुट्टी पर थे। नवगछिया थाने की स्टेशन डायरी भी 16 घंटे पेंडिंग मिली। जबकि स्टेशन डायरी को हर दो घंटे में अपडेट करना होता है। तीनों थानों की स्टेशन डायरी को डीजीपी ने जब्त कर लिया। इसके पश्चात एसपी को साथ लेकर रंगरा ओपी के लिए निकल गए। रेलवे केबिन पर समपार फाटक बंद मिला तो एसपी की गाड़ी से उतरकर पैदल ही रेलवे गुमटी पार कर गए, उस पार खड़ी गश्ती गाड़ी पर सवार होकर रंगरा ओपी जा पहुंचे। एसपी पीछे से ओपी पहुंचीं। यहां के पश्चात डीजीपी भागलपुर फिर बांका गए। दोनों जगहों पर पुलिस की कार्यप्रणाली को देखा और कई आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।

परबत्ता में शिवप्रसाद और राजकुमार बने रंगरा के थानेदार
डीजीपी के निर्देश पर नवगछिया एसपी निधि रानी ने देर रात ही परबत्ता के 13 तथा रंगरा के 11 अफसरों को थाने से बदल दिया। परबत्ता के थानेदार नवनीश कुमार को हेड क्वाटर भेज दिया। इनकी जगह नवगछिया थाने के जेएसआइ शिवप्रसाद रमाणी को परबत्ता का नया थानेदार बनाया गया। यहां के बाकी 12 अफसरों को गोपालपुर थाने में तैनात कर दिया गया। रंगरा के थानेदार प्रमोद साह को हटाकर इनकी जगह ढोलबज्जा के थानेदार राजकुमार सिंह को नया थानाध्यक्ष बनाया गया। यहां सभी 11 अफसरों को एसपी ने लाइन बन्द कर दिया।

सादे लिबास में पहुंचे डीजीपी, नपी दो थानों की पूरी टीम
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने हाल के दिनों में बिहार में बिगड़ती कानून व्यवस्था पर नाराजगी जताते हुए पुलिस के आला अफसरों को कार्यप्रणाली में परिवर्तन लाने का निर्देश दिया था। इसे लेकर बिहार के डीजीपी गुप्तेश्वर पांडेय नवगछिया, भागलपुर और बांका पुलिस की कार्यप्रणाली जानने के लिए गुरुवार की सुबह पांच बजे अचानक कैपिटल एक्सप्रेस से नवगछिया आ धमके। नवगछिया आते ही उन्होंने रंगरा और परबत्ता थाने के थानेदार से लेकर सिपाही तक को बदल दिया। ट्रकों से अवैध उगाही और सड़क लूट की बढ़ती वारदात को लेकर डीजीपी ने यह बड़ी कार्रवाई की। साथ ही ड्यूटी में लापरवाही बरतने पर नवगछिया थाने के ओडी अफसर शंकर सिंह और रंगरा ओपी के एएसआइ कई कांडों के अनुसंधानकर्ता रमेश कुमार साह को निलंबित कर दिया।

अपराधियों पर टूट पड़ने का निर्देश

सूचना पर डीआइजी विकास वैभव तथा नवगछिया एसपी निधि रानी भी नवगछिया थाने आ पहुंचीं। नवगछिया, भागलपुर और बांका में समीक्षा बैठक करते हुए डीजीपी ने थानेदारों से कहा कि पुलिस की सुस्ती के वजह से अपराधी बेलगाम होते हैं। इसलिए अपराधियों पर टूट पड़ें, उसे हमेशा दौड़ाते रहें और खुद भी उसके पीछे भागते रहें। उन्होंने कहा कि कार्य में कोताही करने वाले कई पुलिस कर्मियों को चिह्न्ति किया गया है, जिन्हें 15 दिनों के अंदर कार्य संस्कृति में परिवर्तन लाने को कहा गया है। 15 दिनों के अंदर तीनों जिलों में क्राइम कंट्रोल का रिजल्ट सामने आना चाहिए। शराब की तस्करी किसी भी कीमत पर नहीं होनी चाहिए। शाम में डीजीपी नवगछिया के रास्ते राजधानी एक्सप्रेस से पटना लौट गए।