जिस IPS को कैलाश विजयवर्गीय ने दिखाए थे जूते, उसने 25 वर्ष बाद खुद बताया इस तस्वीर का सच..!

बीजेपी विधायक आकाश विजयवर्गीय की करतूत के पश्चात उनके पिता कैलाश विजयवर्गीय की भी एक तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हो रही थी। उस तस्वीर में कैलाश विजयवर्गीय ने एक अफसर के ऊपर जूते ताने हुए दिखाई दे रहे हैं। उस अफसर का नाम प्रमोद फलणीकर है, अभी एनएसजी में आईजी हैं। प्रमोद फलणीकर ने स्वयं अब इस तस्वीर की सच्चाई बताई है। हालांकि इस घटना के प्रत्यक्षदर्शी मानते हैं कि कैलाश ने जूते मारने के लिए ही उठाए थे।

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बीजेपी महासचिव कैलाश विजयवर्गीय की एक तस्वीर उनके बेटे की गुंडागर्दी के बाद लोग काफी शेयर कर रहे थे। साथ ही इस तस्वीर को शेयर कर बेटे आकाश से उनकी तुलना कर रहे थे। ये तस्वीर आज से करीब 25 साल पुरानी है। जिस अफसर को कैलाश विजयवर्गीय जूते दिखा रहे हैं, वो प्रमोद फलणीकर हैं। 1994 में फलणीकर की पोस्टिंग इंदौर में ही थी।

क्या कहा जा रहा है तस्वीर को लेकर

दरअसल, कैलाश विजयवर्गीय आईपीएस प्रमोद फलणीकर के ऊपर जूता ताने हुए हैं। सोशल मीडिया पर इस तस्वीर को यह कहकर शेयर किया जा रहा है कि इस आईपीएस की विजयवर्गीय ने 1994 में पिटाई की थी। साथ ही कई प्रकार की बातें की जा रही हैं।

प्रमोद फलणीकर ने बताई सच्चाई


तस्वीर में दिख रहे आईपीएस प्रमोद फलणीकर अभी एनएसजी में बतौर आईजी पोस्टेड हैं। तस्वीर वायरल होने के पश्चात उन्होंने इसकी सच्चाई बताई है। प्रमोद फलणीकर ने कहा कि सोशल मीडिया पर इस तस्वीर को गलत तरीके से पेश की जा रही है। यदि कोई किसी पर हमला करता है तो उस इंसान के चेहरे पर तनाव होता है। वहीं, अगर किसी पुलिस अधिकारी पर हमला होगा तो दूसरे अधिकारी शांत से खड़ा नहीं रहेंगे।

आईपीएस प्रमोद फलणीकर ने कहा कि यदि आप उस फोटो को गौर से देखेंगे तो आपको दिखेगा कि कोई भी व्यक्ति तनाव में नहीं है। कैलाश विजयवर्गीय मुझे धमकी नहीं दे रहे थे। साथ ही कोई भी अधिकारी वहां तनाव में नहीं दिख रहा है।

फिर कैलाश ने जूता क्यों निकाला

प्रमोद फलणीकर ने बताया कि कैलाश विजयवर्गीय वहां पानी की समस्या को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे। मैं वहां उनका धरना समाप्त करवाने गया था। तब उन्होंने कहा था कि आपके कहने पर मैं धरना खत्म कर रहा हूं। नगर निगम के चक्कर लगाते-लगाते जूता घिस गया है। आईपीएस ने कहा कि फोटो के वायरल होने से मैं बहुत दुखी हूं।

क्या कहते हैं प्रत्यक्षदर्शी

वहीं, इस घटना के गवाह रहे कुछ लोग मानते हैं कि ये घटना सही है। कैलाश विजयवर्गीय ने आईपीएस पर जूते मारने के लिए ही उठाए थे मगर वे मारे नहीं थे। ये घटना साल 1994 की है। जब कैलाश विजयवर्गीय इंदौर के यशवंत रोड पर धरना दे रहे थे। वे आईपीएस को जूता मारने के लिए बढ़े थे मगर उन्हें आगे जाने से रोक दिया गया था।