जब पुलिस कॉन्सटेबल भाई ने माओवादी बहन पर तान दिया बंदूक तो हुआ कुछ ऐसा, जानें

आपको बता दें कि रामा और कन्नी दोनों भाई-बहनों ने ही 1990 में माओवाद आंदोलन ज्वाइन किया था। रामा बताते हैं कि-'हम दोनों बाल संघम (बाल कैडर) के रूप में शामिल हुए क्योंकि हमें बताया गया था कि यह आंदोलन क्षेत्र के गरीबों के लिए है। लेकिन अब चीजें बदल गई हैं। वर्तमान माओवादी आंदोलन में समर्पण की कमी है और इसलिए मैंने 2018 में आत्मसमर्पण करने का फैसला किया। मुझे फिर पुलिस में नौकरी मिल गई और अगले कुछ महीनों में, मुझे पुलिस कांस्टेबल के पद पर पदोन्नत किया जाएगा।

कभी वेट्टी रामा पर भी लगा हुआ था 6.5 लाख का ईनाम
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रामा भी सीपीआई(एम) की एरिया कमिटी मेंबर थे और उनपर अगस्त 2018 तक 6.5 लाख का ईनाम था। जब रामा से उनके आत्मसमर्पण के पीछे के कारण के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने कहा, 'मेरे जीवन के दो दशक माओवादियों के आंदोलन में समर्पित करने के बाद भी, मुझे एसीएम के पद से हटा दिया गया और बाद में, मुझे सीपीआई (एम) के एक और विभाग में स्थानांतरित कर दिया गया। ... क्या आप कल्पना कर सकते हैं? मैं अपनी पत्नी से सात साल से नहीं मिला था और वरिष्ठ कैडरों में मेरी अडिग प्रतिबद्धता के लिए कोई सम्मान नहीं था।'
 
'तुम एक गद्दार हो, मुझसे आत्मसमर्पण की कभी उम्मीद भी  मत करना'
रामा के आत्मसमर्पण करने के बाद, वह चाहते थे कि उनकी बहन भी खुद को सरेंडर कर दे। रामा ने अपनी बहन को तीन पत्र लिखे और उससे आत्मसमर्पण करने का आग्रह किया। कन्नी ने उसे देशद्रोही करार देते हुए खतों का जवाब दिया। कन्नी ने लिखा 'मुझे कभी भी आत्मसमर्पण के लिए नहीं कहना। मैं मुआवजे के लालच में नहीं हूं मैं एक क्रांतिकारी हूं ... तुम्हें कभी नहीं सोचना चाहिए था कि तुम खुद को बचा सकते हो ... तुम गद्दार हो। पत्र में रामा पर माओवादी आंदोलन को कमजोर करने का आरोप लगाया गया था क्योंकि वह पुलिस बल में शामिल हो गए थे।