जब DM ने प्राइमरी शिक्षक से कहा-"शर्म करो अपने बच्चे होते तो भी ऐसा करते"

प्राथमिक स्कूलों में तैनात शिक्षक वेतन के रूप में मोटी रकम तो ले ही रहे हैं लेकिन बच्चों को ​वह ऐसी शिक्षा दे रहे हैं कि न तो छात्र-छात्राओं को अपने नाम का मतलब तक भी नहीं पता होता है और उन्हें सही से मातृभाषा हिंदी लिखनी तक भी नहीं आती है. शिक्षा की ऐसी बदरंग तस्वीर देखकर भड़के जिलाधिकारी ने यहां मौजूद शिक्षक को भी फटकार लगाई.
loading...
आपको बता दें की डीएम विजय विश्वास पंत सुबह परमट स्थित प्राथमिक स्कूल के निरीक्षण पर पहुंचे थे. शिक्षा की गुणवत्ता जांचने के लिए डीएम ने जब बच्चों ने उनके नाम का मतलब पूछा तो कोई बच्चा उन्हें जवाब नहीं दे पाया. इस पर डीएम ने यहां मौजूद शिक्षक नवीन त्रिपाठी पर नाराजगी जाहिर करते हुए शिक्षा की गुणवत्ता को सुधारने को कहा. यही नहीं, डीएम ने सभी बच्चों को उनके नाम का अर्थ बताने, साफ-सफाई रखने, खाने से पहले हाथ धोने का भी अभ्यास कराने को कहा.
डीएम ने यहां पर छात्रा साक्षी को हिंदी​ लिखने को कहा. इस छात्रा की क्लास में लगातार उपस्थिति थी. इसके बावजूद उसे हिंदी की वर्णमाला में काफी अधिक समय लग गया. इस पर डीएम का पारा एक बार फिर शिक्षक पर चढ़ गया. कई बच्चों को गणित के विषय की भी सही जानकारी नहीं थी. इस पर नाराज डीएम ने शिक्षक से बोला, ‘​शर्म करो, आपके बच्चे होते तो भी ऐसा करते’. बच्चों के हिंदी न लिख पाने से नाराज डीएम शिक्षक की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान खड़ा करते हुए कहा कि अगर बच्चों को गंभीरता से पढ़ाया गया होता तो उन्हें हिंदी​ लिखना और सवाल लगाना आया होता. अध्यापक को सुधार की चेतावनी देते हुए दोबारा जल्द निरीक्षण की भी बात कही.
डीएम यहां पर इतने नाराज थे कि अध्यापक की तगड़ी क्लास लगाई. डीएम ने शिक्षक से कहा कि आपके बच्चे तो इंग्लिश मीडियम स्कूल में पढ़ते होंगे. यदि उन्हें भी अध्यापक इसी तरह पढ़ाए तो आपको कैसा लगेगा. इस दौरान डीएम बच्चों से काफी देर तक घुलमिल कर बातचीत करते रहे. डीएम ने बच्चों को हिन्दी, गणित, सामान्य ज्ञान की बेहतर पढ़ाई के साथ कोई न कोई एक्टिविटी कराने को कहा.
इसके पहले भी डीएम ने जब कुछ स्कूलों का निरीक्षण किया था, तब भी खंड शिक्षा अधिकारियों की भूमिका सवालों के घेरे में आयी थी. यहां पर खंड शिक्षा अधिकारी का स्पष्टीकरण मांगते हुए डीएम ने कहा कि उनकी तरफ से शिक्षा की गुणवत्त जांचने को सही तरह से निरीक्षण नहीं किया जा रहा है. 
डीएम ने अपने बच्चों की तरह ही बच्चों को शिक्षित करने को कहा. डीएम ने कहा कि इस काम के लिए सरकार आपको वेतन दे रही है, इसलिए इंसानियत हो तो बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा दें.