बेटी हमेशा करती थी फोन पर बात, एकदिन पिता ने देख लिया और फिर जो हुआ...

उत्तर प्रदेश के जनपद उन्नाव में मोबाइल फोन पर घंटों बात करने से नाराज पिता ने गुरुवार रात बेटी की पीठ में तमंचा लगाकर गोली मार दी। उसकी मौके पर ही मौत हो गई। चौकीदार की सूचना पर पुलिस पहुंची तो हत्या की घटना की पुष्टि हुई। पुलिस ने चौकीदार की तहरीर पर पिता के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज किया है। जबकि उसकी मां व अन्य घर वालों से पूछताछ हो रही है। 
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पुलिस के मुताबिक फतेहपुर चौरासी थानाक्षेत्र के शकूराबाद गांव निवासी इंटर की छात्रा श्रद्धा उर्फ बिट्टू शर्मा पुत्र बबलू गुरुवार रात करीब दस बजे मोबाइल पर किसी से बात कर रही थी। पिता ने बात करने से मना किया, लेकिन उसके न मानने पर वह आग बबूला हो गया। उसने घर पर रखे तमंचे से बेटी को गोली मार दी। घटना को छिपाने के लिए परिजन शव घर में ही रखे रहे। गांव में चल रही भागवतकथा की सुरक्षा देखने आए चौकीदार जुल्फिकारपुर अमौरा निवासी भोला पुत्र रामगुलाम को हत्या की जानकारी हुई। उसने पुलिस को घटना की जानकारी दी।

रक्तरंजित शव देख उन्होंने पूरे परिवार को हिरासत में लिया...
एसओ फोर्स के साथ घटनास्थल पर पहुंचे। रक्तरंजित शव देख उन्होंने पूरे परिवार को हिरासत में लिया और थाने आए। पूछताछ में पिता ने बेटी की हत्या की बात स्वीकार की है। पिता का कहना था कि बेटी मोबाइल पर लगी रहती थी। कई बार मना किया गया लेकिन न मानने पर यह कदम उठाना पड़ा। चौकीदार की तहरीर पर हत्या, षडयंत्र रचना और साक्ष्य छिपाने का मुकदमा दर्ज किया गया है। 
थानाध्यक्ष नारदमुनि सिंह ने बताया कि चौकीदार की तहरीर पर मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। साथ ही मृतका की मां भाई व बहनों से भी पूछताछ की जा रही है। जांच में जो भी दोषी मिलेगा उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। श्रद्धा इंटर की छात्रा थी। वह शेरपुर कला स्थित एक इंटर कॉलेज में पढ़ाई करती थी। घर की स्थिति ठीक न होने से वह पंडाखेड़ा स्थित एक पब्लिक स्कूल में पढ़ाती भी थी। बेटी की पढ़ाने से पिता नाराज रहता था। स्कूल में पढ़ाने के दौरान ही उसने मोबाइल फोन लिया था। जिससे वह लगातार बात करती रहती थी। 
 
चार भाई-बहनों में बड़ी थी मृतका 
श्रद्धा चार भाई-बहनों में बड़ी थी। मां मधू, भाई हर्ष और बहनों में कावेरी और अनामिका को यह नहीं पता था कि पिता गोली मारकर उसकी हत्या कर देगा। बेटी की मौत से मां और भाई-बहन रो रोकर बेहाल हैं। हत्यारोपी पिता बबलू गांव में बटाई की खेती करने के साथ ही ठेकेदारों के साथ मेट का भी काम करता था। शराब का लती होने के साथ ही वह अपने पास तमंचा भी रखता था। गुस्से में उसी तमंचे से उसने बेटी को मौत के घाट उतार दिया।