लड़के ने लिखा... सुनीता और उसकी फ्रेंड ने मुझे बर्बाद कर दिया, इसलिए मुझको ऐसा कदम उठाना पड़ा

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सरकारी नौकरी नहीं लगने से तनाव में आकर गत माह हर्ष की पहाडियों में युवक ने सुसाइड़ कर लिया था। एक दिन पहले ही उसकी रिजल्ट आया था। आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं होने पर परिजनों ने जयपुर आईजी से मुलाकात कर निष्पक्ष जांच कराए जाने की मांग की है। आईजी एस.सेंगाथिर ने उन्हें मामले की पूरी जांच कर जल्द आरोपियों को गिरफ्तार करवाने का आश्वासन दिया है। महेश पुत्र मदनलाल निवासी ग्राम रामपुरा दूधवा ने बताया कि उसके भाई महीपाल सरकारी नौकरी नहीं लगने से काफी दिनों से तनाव में था। महीपाल से 9.40 लाख रुपए सरकारी नौकरी लगवाने के लिए मुकेश ढाका व रतनलाल ने लिए थे। उनहोंने फर्जी लेटर भी बनाकर दिया था। उन्होंने बताया कि भाई को आत्महत्या करने पर मजबूर होना पड़ा। करीब डेढ़ साल पहले महेश कुमार, कैलाश चंद रामपुरा के सामने 9.40 लाख रुपए में बात की थी। उनमें से दो लाख पचास हजार रुपए एडवांस दिए थे और 6 लाख 90 हजार रुपए लिस्ट में नाम आने के बाद देने थे।

सुसाइड नोट में लिखा: मैं गलत होता तो ऐसा कदम नहीं उठाता 
महीपाल के पास से एक सुसाइड़ नोट भी बरामद हुआ है। जिसमें उसने लिखा कि अगर मैं गलत होता तो ऐसा कदम नहीं उठाना पड़ता। सुनीता भास्कर और उसकी फ्रेंड ने मिलकर इस कदर बर्बाद कर दिया कि सुसाइड़ के लिए दबाव बनाकर मेरा जीवन ही खत्म कर दिया। सुनीता पिछले चार महीने से टॉर्चर कर रही थी कि मुझे ऐसा कदम उठान पड़ा। मुझे माफ कर देना दोस्तों मैं इसका ये बर्ताव सहन नहीं कर पाया। क्योंकि इसने पूरी फैमिली को बर्बाद करने को कहा। उसने लिखा कि रतन और मुकेश ढाका के पास मेरे 9 लाख 60 हजार रुपए दिलवाए हुए है। वो मेरे घर पर दे देना। सुसाइड नोट में सुनीता भास्कर व उसकी दोस्त का नाम भी आया था। जांच के दौरान उसकी रिकॉर्डिंग भी मिली थी। जिसमें वह बोल रही थी कि आपके परिवार को बर्बाद कर दूंगी। इसी कारण से वह कई दिनों से तनाव में चल रहा था।
मुकेश ढाका ने खुद के सैलेरी अकांउट का चैक दिया था। उन्होंने महीपाल को दिल्ली बुलाया था और मेडिकल चेकअप करवाकर बोला कि काम हो जाएगा। वेबसाइट पर भी उसका नाम मिला था तब उसन 6.90 लाख रुपए ले लिए थे। बाद में वह 20 हजार रुपए अलग से ले गया था। मुकेश ढाका ने जल्द ही ट्रेनिंग बैच स्टॉर्ट होने की बात बोली। बाद में कहा कि अभी ऑनलाइन लिस्ट आएगी। 2 मई को ऑनलाइन लिस्ट आई तो उसमें नाम नहीं मिला था। इसके कारण तनाव में आकर उसने तीन मई को सुसाइड़ कर लिया था। उन्होंने बताया कि महीपाल ने बीएड की थी और पढ़ाई में काफी होशियार था। उसने दो बार राजस्थान पुलिस का भी टेस्ट क्लीयर किया था। पिछले दो साल से भर्ती करने के नाम पर पैसे लेकर धोखाधड़ी कर रहा था।