‘मृत’ महिला को घर ले जा रहे थे परिजन, रास्ते में ही अचानक हो गई जिंदा और करने लगी बातें

इंदौर जिले में प्रसूति के लिए नर्सिंग होम ले जाई गई महिला की हालत इंजेक्शन लगाने से बिगड़ गई। उसे दूसरे बड़े अस्पताल ले गए तो वहां परिजन से कहा गया कि ब्रेन हेमरेज होने से बचने की उम्मीद नहीं है। लगभग मौत हो चुकी है। इसके बाद एंबुलेंस में घर ले जाते वक्त सांसें चलने के साथ वह होश में आ गई और बातें करने लगी। उसे दोबारा अस्पताल में भर्ती किया, जहां गंभीर अवस्था में इलाज जारी है। अस्पताल प्रबंधन का कहना है, महिला को मृत घोषित नहीं किया गया था। परिजन वेंटिलेटर से हटाने की रजामंदी देकर ले गए थे।
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कन्नौद (देवास) निवासी शानू खान (29) को प्रसूति के लिए 8 अगस्त को एनर्जी अस्पताल नेमावर रोड में भर्ती किया गया था। परिजन का कहना है, 9 अगस्त को शानू ने बेटे को जन्म दिया। आरोप है, 12 अगस्त को उसे डिस्चार्ज किया जा रहा था, तब स्टाफ नर्स ने एक इंजेक्शन लगाया। दस मिनट बाद शानू के हाथ पर काफी सूजन हो गई और शरीर नीला पड़ गया। दोबारा भर्ती करने के बाद भी सुधार नहीं हुआ तो पांच दिन पहले गोकुलदास अस्पताल में भर्ती करवाया। आईसीयू में उसे वेंटिलेटर पर भी रखा गया। इस दौरान परिजन को मिलने नहीं दिया। सोमवार रात उसे वार्ड में शिफ्ट किया गया। मंगलवार दोपहर फिर हालत बिगडऩे पर आईसीयू ले जाया गया।

कागज पर साइन करवाए और घर भेज दिया
रिश्तेदार जावेद शेख का कहना है, रजिस्टर पर लिखाए नंबर पर कॉल कर बताया कि मरीज को ब्रेन हेमरेज हो गया है, इसलिए अस्पताल में रखने का कोई मतलब नहीं है, घर ले जाएं। हमसे कुछ कागज भी साइन करवाए। शाम 4.30 बजे एंबुलेंस में महिला ने रास्ते में हाथ-पैर हिलाए, इशारों में बात की। हमने तुरंत अस्पताल में फोन लगाया तो कहा गया, मरीज वेंटिलेटर पर थी, इसलिए दस मिनट उसका असर रहेगा।

अब बचने की कोई उम्मीद नहीं है। इसके बाद दोबारा अस्पताल पहुंचकर उसे भर्ती कराया। आईसीयू के ड्यूटी डॉ. दिलीप कुमार ने बताया, मरीज को दिल की बीमारी थी। हार्ट में वॉल्व भी लगा था। सीटी स्कैन में ब्रेन हेमरेज की पुष्टि हुई। मरीज को वेंटिलेटर पर रखा है। मरीज के परिजन लामा लिखकर साथ ले गए थे। हमारी ओर से मरीज को मृत घोषित नहीं किया गया था।