ATM को स्विच Off कर लाखों निकालने का ये तरकीब जानकर उड़ जाएंगे होश, 1 आदमी ने खोला राज

रायपुर शहर में मशीन का स्वीच ऑफ करके रकम निकालने वाले गिरोह का पुलिस ने पता लगा लिया है। गिरोह के एक आदमी को गंज पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। सरगना सहित तीन आरोपी फरार है। गिरोह देशभर में घूमता है और एटीएम मशीनों से राशि चुराता है। सभी आरोपी दिल्ली और उत्तरप्रदेश के हैं। पकड़े गए आरोपी को पुलिस ने दो दिन की रिमांड परलिया है। पुलिस के मुताबिक कुछ बैंकों के एटीएम मशीन से छेड़छाड़ करके राशि का आहरण किया जा रहा था। इससे मशीन से निकली राशि और मशीन में जमा होने वाली राशि के रिकार्ड में भारी अंतर आ रहा था। 
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कंपनी ने इसकी जांच की। इसमें खुलासा हुआ कि एटीएम मशीन में छेड़छाड़ करके कोई राशि का आहरण कर रहा है। इसकी शिकायत गंज थाने में की गई। शिकायत के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू की। जिस खाते से राशि का आहरण हुआ था और एटीएम बूथ से मिले सीसीटीवी फुटेज के आधार पर पुलिस ने कानपुर के गौरव यादव को ढूंढ निकाला। उसने गंज के ओरियंटल बैंक के एटीएम से 10 हजार रुपए का आहरण किया था, लेकिन उसके खाता में राशि कम नहीं हुई थी। पुलिस ने उसे कानपुर से गिरफ्तार किया। पूछताछ में गौरव ने एटीएम मशीन में छेड़छाड़ करके राशि का आहरण करने का खुलासा किया। उसने पूरे गिरोह का खुलासा किया। गंज पुलिस ने गौरव को दो दिन की पुलिस रिमांड पर लिया है।

कैश लोडिंग करते-करते बना लिया गिरोह

पुलिस के मुताबिक गिरोह का सरगना दिल्ली का अमित चौहान है। अमित दिल्ली में एटीएम मशीनों में कैश लोड करने वाली कंपनी में काम करता था। उसे एटीएम मशीन में कैश जमा करने, निकालने सहित अन्य तकनीकी जानकारी थी। बाद में उसने कंपनी में काम करना छोड़ दिया। और एटीएम से छेड़छाड़ करके नगदी चुराना शुरू कर दिया। उसने गौरव व दो अन्य लोगों को अपने साथ मिलाकर गैंग बनाया। इसके बाद चारों मिलकर एटीएम से राशि चुराने लगे। अमित व दो अन्य फरार हैं।

ऐसे करते हैं छेड़छाड़
आरोपी अपने व दोस्तों, रिश्तेदारों, परिचितों के एटीएम कार्ड लेते थे। और एसबीआई या ओरियंटल बैंक के एटीएम में जाते थे। एटीएम मशीन में कार्ड लगाकर राशि आहरण की पूरी प्रक्रिया कर लेते थे। इसके बाद जैसे ही मशीन में नोट की गिनती पूरी होती और नोट डिस्पेचर में आता था, वैसे ही एटीएम मशीन को स्वीच ऑफ कर देते थे। डिस्पेचर में निकले नोट को निकाल लेते थे। इसके बाद मशीन को चालू कर देते थे। एटीएम मशीन बंद करते समय वह डेबिट दिखाता था, लेकिन बंद करके चालू करते ही वह उसी खाते में उतनी ही राशि क्रेडिट बताता था। राशि निकलने के बाद भी उस खाते में पूरी राशि रहती थी, जबकि आहरण होने के बाद उसमें कमी होना चाहिए था। इससे एटीएम में कैश जमा करने वाले और मशीन से आहरण हुई राशि में भारी अंतर रहता था। हर आहरण में एटीएम लगाने वाली कंपनी को कमीशन मिलता था, लेकिन किसी के खाते में आहरण नहीं दिखाने से कंपनी वालों को भारी नुकसान हो रहा था।