जवान बेटे को खोने के बाद एक पिता ने दिखा दिया इतनी ज्यादा हिम्मत...

शाजापुर जिला | दुनिया में सबसे बड़ा गम जवान बेटे की अर्थी पिता के कांधों पर जाए, यह माना गया है। अपने बेटे को पिता अपने कलेजे का टुकड़ा समझता था उसी पिता ने बीती रात राष्ट्रीय राजमार्ग पर दुर्घटना के बाद बिखरे अपने 'कलेजे के टुकड़ेÓ के टुकड़े-टुकड़े चादर में समेटे। पिता की इस हिम्मत को देखते हुए सभी लोगों की आंखों से आंसू बहने लगे। वहीं परिवार के सदस्यों का अपने मुखिया की इसी हिम्मत को देखते हुए हौसला नहीं टूटा। हृदय विदारक और झकझोर कर रख देने वाली दुर्घटना के बाद शहर में भी माहौल गमगीन हो गया।
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अपने प्रतिदिन के कार्य को खत्म करने के बाद रविवार रात वरिष्ठ कांग्रेसी नेता महेंद्रसिंह सेंगर और उनका पुत्र संजय सेंगर ट्रेवल्स कार्यालय से निकलकर अगले दिन के लिए अपनी ट्रेवल्स की सभी बसों में डीजल की आपूर्ति करवाने के लिए पेट्रोल पंप पर वाहन लेकर जा रहे थे। ट्रैफिक पाइंट स्थित अपने कार्यालय से जाकर संजय ने पहले दो बसों में डीजल डलवाया और वापस बस स्टैंड आ गया। इसी दौरान पिता महेंद्र सेंगर भी एक अन्य बस लेकर डीजल डलवाने के लिए पहुंच गए। 

मोबाइल पर पिता-पुत्र की चर्चा के बाद पुत्र संजय पांच मिनट में पेट्रोल पंप आने की बात कहते हुए अपने दो पहिया वाहन से पेट्रोल पंप की ओर निकल पड़ा। जिस बस में पिता सवार थे उसे ओवरटेक करके संजय आगे निकल गया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार संजय सड़क के गड्ढों से बचने के लिए मशक्कत कर रहा था इसी दौरान वो उछलकर पीछे आ रहे ट्रक के सामने सड़क पर गिर गया। ट्रक चालक को संभलने का मौका तक नहीं मिला और ट्रक के सभी पहिये संजय के शरीर के ऊपर से निकल गए। हादसे के बाद सड़क पर जाम लग गया। इस जाम में संजय के पिता की बस भी करीब 100 मीटर पीछे फंस गई।

पिता ने जानकारी ली तो पता लगा हादसा हुआ है
सड़क पर लगा जाम नहीं खुलने पर बस में सवार महेंद्रसिंह सेंगर ने पता किया तो बस के कर्मचारियों ने बताया कि आगे दुर्घटना हुई है। इस पर हर तरह के हादसे में सबसे पहले पहुंचकर मदद करने की अपनी आदत अनुसार महेंद्र सेंगर स्वयं पैदल चलते हुए दुर्घटना स्थल पर पहुंच गए। यहां जो दृश्य देखा उसकी उन्होंने कभी कल्पना भी नहीं की थी। यह नजारा को देखकर हर कोई स्तब्ध था। दुर्घटना में अपने पुत्र को खोने के बाद भी अपने लाडले के शरीर के टुकड़े सड़क पर बिखरे हुए देखने के बाद भी उन्होंने अपने आप को संभाला और मौके पर ही किसी से चादर मांगकर उसमें अपने बेटे के शव के बिखरे टुकड़ों को समेटा। इसके बाद भी महेंद्र सेंगर ने हिम्मत नहीं हारी और शव को लेकर जिला अस्पताल आ गए। अपने पांच भाइयों एवं 100 से अधिक परिजनों के मुखिया का यह हौसला परिवार को भी टूटने नहीं दे रहा था।

बेटे की चिता जलने के बाद पिता हुए बेहोश
जिला अस्पताल में देर रात लेकर अगले दिन दोपहर तक पिता महेंद्र सेंगर अपने लाडले के शव के पास ही रहे। अस्पताल में पोस्टमार्टम भी उनकी आंखों के सामने ही हुआ। उल्लेखनीय है कि महेंद्र सेंगर प्रदेश के जल संसाधन मंत्री हुकुमसिंह कराड़ा के सहपाठी होकर निरंतर प्रतिनिधि रहे है। दोपहर 1 बजे नीमवाड़ी स्थित स्वनिवास से निकली अंतिम यात्रा में दर्दनाक हादसे की खबर मिलने पर पूरा शहर उमड़ आया था। शांति वन में पिता ने अपने पुत्र के अंतिम संस्कार की सभी परंपराओं का निर्वहन किया, लेकिन जब बेटे की चिता को जलते हुए देखा तो उनके सब्र का बांध टूट गया और वे मौके पर ही बेहोश हो गए। यहां पर परिजनों ने उन्हें संभाला। शहर में एक पिता के इस धैर्य, संयम और हिम्मत को लेकर लोगों में चर्चा बनी हुई है। 

दो बच्चों के सिर से उठा पिता का साया

जानकारी के अनुसार 32 वर्षीय संजय की पांच साल की एक बेटी और डेढ़ साल का बेटा है। संजय को मुखाग्नि अपने दादा की गोद में बैठकर डेढ़ साल के बेटे ने दी। यह दृश्य देखकर शांतिवन में मौजूद सभी लोगों की आंखों में आंसू आ गए।